लखनऊ, । उत्तर प्रदेश में आयुष चिकित्सा सेवाओं को अधिक सुलभ, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में आयोजित नेशनल आयुष मिशन-उत्तर प्रदेश की 12वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक में वर्ष 2026-27 की ₹613.42 करोड़ की राज्य वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी दी गई। बैठक में आयुष चिकित्सा सेवाओं के विस्तार, मेडिकल शिक्षा, स्वास्थ्य अवसंरचना और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने प्रदेश में निर्माणाधीन राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों की धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रमुख सचिव आयुष और मिशन निदेशक प्रत्येक माह परियोजनाओं की समीक्षा करें तथा नियमित स्थलीय निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि सभी निर्माण कार्य तय समयसीमा और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरे हों। उन्होंने यह भी कहा कि भवन निर्माण के साथ-साथ आवश्यक चिकित्सकीय एवं प्रशासनिक पदों के सृजन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाए, ताकि भवन तैयार होते ही संस्थानों का संचालन शुरू किया जा सके।
मुख्य सचिव ने प्रदेश में संचालित आयुष डिस्पेंसरी, अस्पतालों और आरोग्य मंदिरों के उन्नयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि इन संस्थानों में स्वच्छता, हरित वातावरण, जनसुविधाओं और मरीजों के लिए बेहतर उपचार व्यवस्था विकसित की जाए। परिसर में लैंडस्केपिंग और हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ डिस्पेंसरियों की कार्यक्षमता बढ़ाकर अधिक से अधिक लोगों को गुणवत्तापूर्ण आयुष सेवाएं उपलब्ध कराने पर बल दिया गया।
बैठक में स्वीकृत ₹613.42 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना में ₹458.99 करोड़ नई परियोजनाओं तथा ₹154.42 करोड़ सतत (ऑनगोइंग) गतिविधियों पर खर्च किए जाएंगे। इस बजट में आयुष चिकित्सा सेवाओं के विस्तार, शिक्षण संस्थानों के विकास, फ्लेक्सी पूल तथा प्रशासनिक व्यय को शामिल किया गया है। प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय को भेजा जाएगा।
कार्ययोजना के अंतर्गत प्रदेश में 23 नए आयुष मेडिकल यूनिट स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा राजकीय आयुर्वेद कॉलेज, वाराणसी में छात्राओं के लिए लगभग ₹1.78 करोड़ की लागत से छात्रावास का द्वितीय तल बनाया जाएगा। प्रदेश के 17 आयुष कॉलेजों में 51 स्मार्ट क्लासरूम स्थापित करने के लिए लगभग ₹3.03 करोड़ खर्च किए जाएंगे। साथ ही झांसी और शाहजहांपुर में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों के निर्माण तथा नई आयुष डिस्पेंसरियों की स्थापना भी प्रस्तावित है।
बैठक में प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बताया कि गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत लखीमपुर खीरी में वर्ष 2025-26 के दौरान 2.12 लाख से अधिक मरीजों की स्क्रीनिंग, परामर्श और रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
उन्होंने जानकारी दी कि आयुष मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से प्रदेश के नौ आकांक्षी जिलों—बहराइच, बलरामपुर, चंदौली, चित्रकूट, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र और कुशीनगर—के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत 19,726 मरीजों को उपचार और परामर्श उपलब्ध कराया गया।
इसके अलावा ऑस्टियोआर्थराइटिस एवं अन्य मस्कुलोस्केलेटल रोगों के लिए संचालित राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत प्रदेश के आठ आयुर्वेद कॉलेजों में 37,414 मरीजों को लाभ मिला, जबकि 'कारुण्य' समेकित सहायक एवं पैलिएटिव केयर कार्यक्रम के माध्यम से लखनऊ, गोरखपुर, अयोध्या और गाजीपुर के 55 विकासखंडों में 3,909 मरीजों को घर-घर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
बैठक में स्वीकृत कार्ययोजना यह संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश सरकार आयुष चिकित्सा को केवल वैकल्पिक उपचार पद्धति तक सीमित न रखकर उसे सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का मजबूत हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, मुख्य सचिव द्वारा निर्माण कार्यों की धीमी गति पर जताई गई नाराजगी यह भी दर्शाती है कि योजनाओं की सफलता केवल बजट स्वीकृत होने से नहीं, बल्कि उनके समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। यदि नई परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं और ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक आयुष सेवाओं का प्रभावी विस्तार होता है, तो यह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।
News Source -news of India Edit By-Mohammad Sayeed

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