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वित्तीय धोखाधड़ी पर सख्ती के संकेत: मुख्य सचिव ने फर्जी निवेश योजनाओं और अवैध ऋण कारोबार पर कड़ी कार्रवाई के दिए निर्देश


लखनऊ, । उत्तर प्रदेश में बढ़ते वित्तीय अपराधों, फर्जी निवेश योजनाओं और अवैध वित्तीय गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा संयोजित राज्य स्तरीय समन्वय समिति (एसएलसीसी) की 21वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में बहुराज्यीय सहकारी समितियों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों, अवैध रूप से जमा स्वीकार करने वाली कंपनियों, आर्थिक अपराधों की जांच, साइबर धोखाधड़ी तथा आम नागरिकों को वित्तीय अपराधों से बचाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि आम जनता को किसी भी निवेश योजना में धन लगाने से पहले संबंधित संस्था के दस्तावेजों और उसके आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी का अनिवार्य रूप से सत्यापन करना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों को सुरक्षित निवेश के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाएं, जिससे वे फर्जी कंपनियों और आकर्षक मुनाफे के झांसे से बच सकें।

मुख्य सचिव ने 'सचेत' पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिया कि संबंधित विभाग हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करें और उसकी प्रगति पोर्टल पर अपडेट करें, ताकि शिकायतकर्ताओं को पारदर्शी तरीके से जानकारी मिलती रहे।

उन्होंने अवैध वित्तीय गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई गैर-निगमित संस्था अत्यधिक ब्याज दर पर ऋण देती है, अनावश्यक प्रोसेसिंग शुल्क वसूलती है, ऋण वसूली में अनैतिक तरीके अपनाती है अथवा नकली सेविंग बॉन्ड जारी करती है, तो उसके विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए।

मुख्य सचिव ने आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) को निर्देश दिए कि वित्तीय धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य आर्थिक अपराधों की जांच में तेजी लाई जाए। साथ ही प्रभावी अभियोजन के माध्यम से दोषियों को शीघ्र सजा दिलाने की दिशा में ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए केवल जांच पर्याप्त नहीं, बल्कि दोषसिद्धि भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि वित्तीय एवं साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए बैंकों, प्रवर्तन एजेंसियों, पुलिस और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। शिकायतों के त्वरित निस्तारण और सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी सहमति बनी।

भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक राजीव द्विवेदी ने वित्तीय साक्षरता को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जागरूक नागरिक ही वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच हैं। उन्होंने आरबीआई की ओर से वित्तीय जागरूकता कार्यक्रमों को और व्यापक स्तर पर संचालित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक में सचिव वित्त संदीप कौर, आरबीआई की डीजीएम हैमन्ती सरकार, आईजी गीता सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

समीक्षा

एसएलसीसी की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब ऑनलाइन निवेश योजनाओं, फर्जी सहकारी समितियों, साइबर ठगी और अवैध ऋण ऐप्स के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में सरकार का फोकस केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं, बल्कि वित्तीय साक्षरता, संस्थागत समन्वय और समयबद्ध शिकायत निस्तारण पर भी दिखाई देता है। हालांकि इन निर्देशों की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रवर्तन एजेंसियां अवैध वित्तीय नेटवर्क पर कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से कार्रवाई करती हैं तथा आम नागरिकों तक जागरूकता अभियान कितनी व्यापकता से पहुंच पाता है। यदि निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है, तो प्रदेश में वित्तीय अपराधों पर अंकुश लगाने और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

News Source -News of India - Edit By-Mohammad Sayeed 

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