(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे "ऑपरेशन कन्विक्शन" अभियान के तहत संतकबीरनगर पुलिस को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। प्रभावी विवेचना और अभियोजन पक्ष की सशक्त पैरवी के आधार पर गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में न्यायालय ने चार अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को सात-सात वर्ष के कारावास और 30-30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। चारों पर कुल 1 लाख 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में संचालित अभियान के तहत गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी द्वितीय डा. दिव्यानंद द्विवेदी की अदालत ने थाना कोतवाली खलीलाबाद में वर्ष 2004 में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में फैसला सुनाया।
न्यायालय ने रामशिव चौधरी, मुन्ना उर्फ जितेन्द्र, भोदू उर्फ सत्यप्रकाश तथा दिलीप चौधरी को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम की धारा 3(1) के तहत दोषी करार देते हुए सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक अभियुक्त पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह मामला वर्ष 2004 में दर्ज हुआ था, जिसमें पुलिस द्वारा विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोप सिद्ध करने में सफलता प्राप्त की।
लगातार मिल रहे ऐसे फैसले यह संकेत देते हैं कि ऑपरेशन कन्विक्शन केवल मुकदमे दर्ज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावी विवेचना और मजबूत पैरवी के जरिए दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। हालांकि, अपराध नियंत्रण की दृष्टि से यह भी आवश्यक है कि गंभीर मामलों की सुनवाई समयबद्ध हो, ताकि पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सके और संगठित अपराध में शामिल तत्वों के खिलाफ कानून का भय और अधिक मजबूत हो।

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