(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। दहेज उत्पीड़न और दहेज मृत्यु के एक गंभीर मामले में थाना बेलहरकला पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पति समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए गिरफ्तारी की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर की गई।
पुलिस के अनुसार थाना बेलहरकला में दर्ज मुकदमा संख्या 218/2026 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2), 85, 238 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत वांछित आरोपी विकेश, उसकी मां तिजिया और बहन गुलाबी, निवासी ग्राम राजेबोहा, को उनके गांव से गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी मेंहदावल के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी हरिकेश भारती के नेतृत्व में गठित टीम ने की।
पुलिस के मुताबिक, मृतका के पिता ने 29 जुलाई को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनकी पुत्री को विवाह के बाद से ही अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोप है कि 22 जुलाई को उसके साथ मारपीट की गई, जिससे गर्दन में गंभीर चोट आई। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
हालांकि, यह मामला एक बार फिर समाज में व्याप्त दहेज प्रथा की भयावह सच्चाई को उजागर करता है। कानून सख्त होने और लगातार जागरूकता अभियानों के बावजूद दहेज उत्पीड़न और दहेज मृत्यु के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे मामलों में वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष विवेचना, समयबद्ध अभियोजन और दोषियों को शीघ्र सजा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और समाज में प्रभावी संदेश जाए।
सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ केवल कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि परिवार, समाज, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों की संयुक्त भागीदारी से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। तभी दहेज के कारण होने वाली बेटियों की असमय मौतों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

Post a Comment