Top News

साइबर ठगी के शिकार पीड़ित को संतकबीरनगर साइबर क्राइम थाना ने लौटाए ₹1.49 लाख, समय पर शिकायत से बची रकम



(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

संतकबीरनगर। साइबर ठगी के मामलों में समय पर की गई शिकायत और त्वरित कार्रवाई पीड़ित की रकम बचाने में कितनी अहम साबित हो सकती है, इसका उदाहरण संतकबीरनगर में सामने आया है। ‘क्रैक साइबर क्राइम’ अभियान के तहत साइबर क्राइम थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक पीड़ित की 1 लाख 49 हजार 900 रुपये की पूरी धनराशि वापस करा दी।

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने के लिए साइबर क्राइम थाना लगातार शिकायतों पर कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में 11 अगस्त 2026 को खलीलाबाद थाना क्षेत्र के पखुआपार निवासी रामबचन चौरसिया पुत्र सूर्यभान के एसबीआई क्रेडिट कार्ड से साइबर अपराधियों ने धोखाधड़ी कर ₹1,49,900 की अवैध ट्रांजेक्शन कर ली थी।

शिकायत मिलते ही शुरू हुई कार्रवाई

ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने संबंधित बैंक और तकनीकी माध्यमों से कार्रवाई शुरू की। त्वरित हस्तक्षेप करते हुए पुलिस ने ठगी की रकम को होल्ड कराया और आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी कराई।

लगातार कार्रवाई के बाद 17 अगस्त 2026 को पूरी ₹1,49,900 की धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई। रकम वापस मिलने के बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम थाना पुलिस की कार्यवाही की सराहना की।

समय पर शिकायत बनी रकम वापसी की वजह

साइबर ठगी के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू समय है। ठगी के बाद यदि पीड़ित तत्काल शिकायत करता है तो संबंधित बैंकिंग चैनल में रकम को होल्ड कराने और उसे वापस कराने की संभावना बढ़ जाती है। संतकबीरनगर पुलिस की इस कार्रवाई से भी यही संदेश सामने आता है कि साइबर अपराध का शिकार होने के बाद घबराने या चुप बैठने के बजाय तत्काल शिकायत करना जरूरी है।

इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक रमेश यादव, उपनिरीक्षक जय प्रकाश यादव, महिला मुख्य आरक्षी अमृता सिंह तथा आरक्षी राघवेन्द्र कुमार सिंह की भूमिका रही।

पुलिस की अपील—सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

साइबर अपराध लगातार नए तरीकों के साथ सामने आ रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने आमजन से किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अज्ञात खाते में रकम ट्रांसफर न करने की अपील की है। बैंक अधिकारी बनकर आने वाले संदिग्ध फोन कॉल या संदेशों पर भरोसा न करने और किसी अज्ञात लिंक पर क्लिक नहीं करने की सलाह दी गई है।

पुलिस ने विशेष रूप से लोगों को बैंक खाता संबंधी जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड और यूपीआई पिन किसी के साथ साझा नहीं करने को कहा है। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो उसे बिना समय गंवाए 1930 पर कॉल करने अथवा नजदीकी थाने के साइबर सेल को सूचना देने की सलाह दी गई है।

कार्रवाई से बढ़ा भरोसा, लेकिन जागरूकता अब भी जरूरी

साइबर क्राइम थाना द्वारा ठगी की पूरी रकम वापस कराना निश्चित रूप से पीड़ित के लिए राहत की बात है, लेकिन यह मामला आम लोगों के लिए चेतावनी भी है। डिजिटल लेनदेन की बढ़ती सुविधा के साथ साइबर ठगी का जोखिम भी बढ़ रहा है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई नुकसान को कम कर सकती है, लेकिन साइबर अपराध से बचाव की पहली जिम्मेदारी सतर्कता की है।

संतकबीरनगर पुलिस की इस कार्रवाई से जहां पीड़ित को आर्थिक राहत मिली है, वहीं यह संदेश भी गया है कि साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत शिकायत और त्वरित पुलिस कार्रवाई रकम वापस कराने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
Mission Sandesh
Mission Sandesh