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ऑपरेशन मजनू: संतकबीरनगर में मनचलों पर पुलिस का शिकंजा, दो दिन में 226 से भरवाया माफीनामा



(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

संतकबीरनगर। छात्राओं और महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में जनपद पुलिस ने दो दिवसीय “ऑपरेशन मजनू” चलाकर मनचलों और सार्वजनिक स्थानों पर अशोभनीय गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की। स्कूल-कॉलेजों के आसपास पुलिस की सक्रियता के साथ ही कम उम्र में वाहन चलाने वाले किशोरों पर भी कार्रवाई और जागरूकता का अभियान चलाया गया।

अभियान के दौरान जिले के सभी थाना क्षेत्रों में स्कूल-कॉलेज, शिक्षण संस्थानों के आसपास, प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई। पुलिस टीमों ने अनावश्यक रूप से घूमने वाले युवकों, छात्राओं एवं महिलाओं को असहज करने वाली गतिविधियों में शामिल लोगों तथा यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले कम उम्र के वाहन चालकों की चेकिंग की।


226 युवकों से भरवाया गया माफीनामा

पुलिस के अनुसार, दो दिनों की कार्रवाई में अनुचित गतिविधियों में संलिप्त अथवा अनावश्यक रूप से घूमते पाए गए 226 युवकों से माफीनामा भरवाया गया। पुलिस ने उन्हें भविष्य में ऐसी गतिविधियों की पुनरावृत्ति न करने की कड़ी हिदायत दी। वहीं, कार्रवाई को केवल चेतावनी तक सीमित न रखते हुए कई मामलों में कानूनी प्रावधानों के तहत भी कदम उठाए गए।

अभियान के दौरान 123 वाहनों का चालान किया गया और 1.25 लाख रुपये सम्मन शुल्क वसूल किया गया। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले पांच दोपहिया वाहनों को सीज किया गया। इसके अलावा सात व्यक्तियों का धारा 170/126/135 बीएनएसएस के तहत चालान, एक व्यक्ति के विरुद्ध धारा 296 बीएनएस में अभियोग तथा 12 व्यक्तियों का धारा 355 बीएनएस के तहत चालान किया गया।


कार्रवाई के साथ जागरूकता पर भी जोर

ऑपरेशन मजनू की खास बात यह रही कि पुलिस ने मनचलों के खिलाफ कार्रवाई के साथ कम उम्र में वाहन चलाने वाले किशोरों और उनके अभिभावकों को भी जागरूक किया। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की कि वे नाबालिग बच्चों को समय से पहले वाहन न दें। कम उम्र में वाहन चलाना न केवल कानून का उल्लंघन हो सकता है, बल्कि सड़क हादसे की गंभीर वजह भी बन सकता है।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि स्कूल-कॉलेजों के आसपास अनावश्यक रूप से घूमना, छात्राओं का पीछा करना, अशोभनीय टिप्पणी करना, छेड़खानी या महिलाओं को असहज करने वाला व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।


बेटियों की सुरक्षा के लिए निरंतर अभियान की जरूरत

ऑपरेशन मजनू के आंकड़े बताते हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन और महिला सुरक्षा को लेकर निरंतर निगरानी की जरूरत बनी हुई है। केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है; परिवार, शिक्षण संस्थान और समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। खासकर नाबालिगों के वाहन चलाने के मामलों में अभिभावकीय निगरानी और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता महत्वपूर्ण है।

पुलिस का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि छात्राओं और महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना तथा युवाओं में कानून और सामाजिक मर्यादा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अभियान को आगे भी जारी रखने की बात कही गई है। आमजन से अपील की गई है कि किसी भी मनचले या संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

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