संतकबीरनगर। महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों तथा सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत जनपद के विभिन्न विकासखंडों में बहू-बेटी सम्मेलन एवं महिला सशक्तिकरण चौपाल आयोजित किए गए। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देश और अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन में पुलिस की एंटी रोमियो टीमों ने ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर महिलाओं और बालिकाओं से सीधे संवाद किया।
जनपद में 09 स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में 236 महिलाओं एवं बालिकाओं ने भाग लिया। कार्यक्रमों का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग करना और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
गांवों में पहुंची पुलिस, चौपाल के जरिए संवाद
एंटी रोमियो टीमों और महिला बीट अधिकारियों ने विभिन्न विकासखंडों में चौपाल लगाकर महिलाओं से संवाद किया। कोतवाली खलीलाबाद की टीम ने खलीलाबाद ब्लॉक में 17, दुधारा पुलिस ने सेमरियावां में 41, धनघटा पुलिस ने हैसर व पौली में 37, महुली पुलिस ने नाथनगर में 18, मेंहदावल पुलिस ने मेंहदावल में 18, बखिरा पुलिस ने बघौली में 30, बेलहरकला पुलिस ने बेलहरकला में 21 और धर्मसिंहवा पुलिस ने सांथा ब्लॉक में 38 महिलाओं एवं बालिकाओं को जागरूक किया।
चौपाल में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, मातृ शक्ति को सम्बल योजना, निराश्रित महिला पेंशन और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना समेत विभिन्न महिला कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
हेल्पलाइन से लेकर साइबर अपराध तक चर्चा
कार्यक्रमों में महिलाओं को 1090 वूमेन पावर लाइन, 112 पुलिस आपातकालीन सेवा, 108 एंबुलेंस, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन, 102 स्वास्थ्य सेवा, 181 महिला हेल्पलाइन, 1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और 1930 साइबर हेल्पलाइन के बारे में बताया गया। इसके साथ ही गुड टच-बैड टच, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध, आत्मरक्षा और कानूनी अधिकारों जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।
महिलाओं को पंपलेट वितरित कर यह संदेश दिया गया कि किसी भी तरह की हिंसा, उत्पीड़न या साइबर अपराध की स्थिति में चुप रहने के बजाय उपलब्ध सहायता तंत्र का इस्तेमाल करें।
जागरूकता से आत्मविश्वास बढ़ने का दावा
बहू-बेटी सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीण महिलाओं से सीधे संवाद रहा। महिलाओं ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष घरेलू हिंसा और पति-पत्नी के विवाद जैसी समस्याओं को साझा करने का अवसर मिलने की बात कही। कुछ प्रतिभागियों ने बताया कि ऐसे कार्यक्रमों से उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है और उन्हें अपनी प्रतिभा तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिला है।
योजनाओं की जानकारी से आगे, निरंतर संवाद जरूरी
मिशन शक्ति जैसे कार्यक्रम तभी प्रभावी माने जाएंगे जब योजनाओं और हेल्पलाइन की जानकारी वास्तविक जरूरत के समय महिलाओं तक पहुंचे और शिकायत करने के बाद उन्हें समयबद्ध सहायता भी मिले। केवल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित फॉलोअप और शिकायतों के प्रभावी निस्तारण की व्यवस्था भी जरूरी है।
बहू-बेटी सम्मेलनों ने महिलाओं को अपनी बात रखने का मंच जरूर उपलब्ध कराया है। पुलिस का दावा है कि ऐसे संवाद कार्यक्रम आगे भी जारी रखे जाएंगे, ताकि महिलाओं में सुरक्षा का भरोसा मजबूत हो और वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें।

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