(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संत कबीर नगर। खरीफ सीजन में उर्वरकों की बढ़ती मांग और कालाबाजारी की आशंकाओं के बीच जिला प्रशासन ने जिलेभर में उर्वरक विक्रेताओं के खिलाफ व्यापक औचक निरीक्षण अभियान चलाया। जिलाधिकारी के निर्देश पर कृषि विभाग और राजस्व प्रशासन की संयुक्त टीमों ने तीनों तहसीलों में कुल 33 उर्वरक दुकानों की जांच की, जिसमें अनियमितताएं मिलने पर चार प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित करते हुए नोटिस जारी किए गए। वहीं आठ उर्वरक नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार यादव ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार खलीलाबाद, धनघटा और मेहदावल तहसीलों में कृषि विभाग एवं उप जिलाधिकारियों की संयुक्त टीमों ने औचक छापेमारी की। निरीक्षण के दौरान धनघटा में आठ दुकानों की जांच कर दो नमूने लिए गए तथा अभिलेख अधूरे मिलने पर एक दुकानदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। खलीलाबाद में 16 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर पांच नमूने लिए गए, जबकि मेहदावल में नौ दुकानों की जांच के दौरान एक नमूना संग्रहित किया गया।
कार्रवाई के दौरान मेहदावल में अभिलेख अद्यतन न रखने तथा खलीलाबाद क्षेत्र में निरीक्षण के समय दुकान बंद कर अनुपस्थित पाए जाने जैसी अनियमितताओं पर प्रजापति ट्रेडर्स (महुआदांड), चौधरी खाद-बीज भंडार (चमरसन) और आईएफएफडीसी महुआदांड सहित कुल चार प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर नोटिस जारी किए गए। कई सहकारी समितियों, एग्री जंक्शन और निजी उर्वरक केंद्रों का भी निरीक्षण किया गया।
जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि प्रयोगशाला जांच में यदि कोई नमूना अमानक पाया जाता है तो उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत संबंधित विक्रेता के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने तथा कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
हमारी समीक्षात्मक दृष्टि
प्रशासन की यह कार्रवाई किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा जब प्रयोगशाला जांच समयबद्ध तरीके से पूरी हो और दोषी पाए जाने वाले प्रतिष्ठानों पर केवल नोटिस जारी करने तक सीमित न रहकर प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई भी की जाए। हर खरीफ और रबी सीजन में छापेमारी की खबरें सामने आती हैं, लेकिन किसानों की शिकायतें पूरी तरह समाप्त नहीं हो पातीं। ऐसे में आवश्यक है कि निरीक्षण अभियान को केवल औपचारिकता न बनाकर नियमित निगरानी, पारदर्शी जांच और कार्रवाई के परिणाम भी सार्वजनिक किए जाएं, ताकि बाजार में गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और कालाबाजारी पर स्थायी रोक लग सके।



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