संतकबीरनगर। महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों तथा सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत जनपद में पुलिस ने ग्रामीण स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया। विकासखंड स्तर पर आयोजित बहू-बेटी सम्मेलन एवं महिला सशक्तिकरण चौपालों में कुल 299 महिलाओं एवं बालिकाओं ने सहभागिता की। कार्यक्रमों का उद्देश्य महज योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि महिलाओं को अपनी समस्याएं खुलकर रखने और जरूरत पड़ने पर कानून का सहारा लेने के लिए आत्मविश्वास प्रदान करना रहा।
पुलिस कार्यालय के मीडिया सेल के अनुसार, पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देश पर महिला सशक्तिकरण, एंटी रोमियो अभियान तथा महिला सुरक्षा एवं जागरूकता को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा जनपद के सभी सर्किलों के क्षेत्राधिकारियों के पर्यवेक्षण में सभी थानों की एंटी रोमियो टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों में चौपाल लगाकर महिलाओं और बालिकाओं से सीधे संवाद किया।
9 स्थानों पर पहुंचा अभियान, ग्रामीण महिलाओं से सीधा संवाद
अभियान के तहत थाना कोतवाली खलीलाबाद की टीम ने खलीलाबाद ब्लॉक में 42, थाना दुधारा ने सेमरियावां ब्लॉक में 32, थाना धनघटा ने हैसर और पौली ब्लॉक में 64, थाना महुली ने नाथनगर ब्लॉक में 28, थाना मेंहदावल ने मेंहदावल ब्लॉक में 34, थाना बखिरा ने बघौली ब्लॉक में 42, थाना बेलहरकला ने बेलहरकला ब्लॉक में 32 तथा थाना धर्मसिंहवा ने सांथा ब्लॉक में 25 महिलाओं, बहू-बेटियों एवं बालिकाओं को जागरूक किया।
इन आयोजनों में ग्रामीण महिलाओं से चौपाल शैली में संवाद करते हुए उन्हें मिशन शक्ति 5.0 के उद्देश्यों और महिला कल्याण से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
योजनाओं की जानकारी के साथ अधिकारों पर भी जोर
कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, मातृ शक्ति को सम्बल योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई।
समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो ऐसे कार्यक्रमों की उपयोगिता केवल योजनाओं की सूची बताने तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र महिलाओं तक योजनाओं की वास्तविक जानकारी पहुंचना और उन्हें आवेदन, अधिकार तथा शिकायत की प्रक्रिया से परिचित कराना महिला सशक्तिकरण की दिशा में अधिक प्रभावी कदम हो सकता है।
हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी, साइबर अपराध और घरेलू हिंसा पर चर्चा
महिलाओं और बालिकाओं को 1090 वूमेन पावर लाइन, 112 पुलिस आपातकालीन सेवा, 108 एंबुलेंस, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन, 102 स्वास्थ्य सेवा, 181 महिला हेल्पलाइन, 1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और 1930 साइबर हेल्पलाइन की जानकारी दी गई।
चौपालों में गुड टच-बैड टच, घरेलू हिंसा, पति-पत्नी के विवाद, साइबर अपराध, आत्मरक्षा और महिला अधिकारों जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। महिला बीट अधिकारियों एवं मिशन शक्ति टीमों ने महिलाओं को पंपलेट वितरित कर उन्हें आपात स्थिति में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
‘निडर होकर अपनी बात रखें’—पुलिस का संदेश
महिला बीट अधिकारियों ने महिलाओं से कहा कि वे किसी भी प्रकार के अन्याय, उत्पीड़न या हिंसा को चुपचाप सहन न करें और जरूरत पड़ने पर पुलिस तथा संबंधित हेल्पलाइन की सहायता लें। ग्रामीण महिलाओं के साथ संवाद का यह तरीका महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई मामलों में सामाजिक दबाव या जानकारी के अभाव में महिलाएं अपनी समस्या संबंधित संस्थाओं तक नहीं पहुंचा पातीं।
महिलाओं ने बताया—बढ़ा पुलिस पर भरोसा
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने इसे अपने अनुभव साझा करने का अवसर बताया। महिलाओं के अनुसार, घरेलू हिंसा और पति-पत्नी के विवाद जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा करने से उन्हें अपनी समस्याओं को सामने रखने का आत्मविश्वास मिला। कुछ महिलाओं ने अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनने की इच्छा भी व्यक्त की।
महिलाओं ने यह भी कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से पुलिस के प्रति उनका विश्वास बढ़ा है और स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस करने का माहौल बना है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से जारी रखने की आवश्यकता बताई।
जागरूकता से आगे निरंतर संवाद की जरूरत
मिशन शक्ति 5.0 के तहत आयोजित ये चौपालें महिला सुरक्षा को पुलिस की कार्रवाई से आगे जन-जागरूकता और संवाद से जोड़ने का प्रयास हैं। हालांकि इन कार्यक्रमों की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि सम्मेलन के बाद कितनी महिलाएं योजनाओं का लाभ उठा पाती हैं, कितनी शिकायतें प्रभावी ढंग से दर्ज होती हैं और जरूरतमंद महिलाओं को समय पर सहायता मिलती है। यदि चौपालों के बाद भी महिला बीट अधिकारियों द्वारा नियमित फॉलोअप और गांव स्तर पर संवाद जारी रखा जाए, तो यह अभियान ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास और सुरक्षा व्यवस्था से उनके जुड़ाव को और मजबूत कर सकता है।




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