Top News

वर्दी में सेवा, हाथों में झाड़ू: संतकबीरनगर पुलिस ने सावन के बाद मंदिरों और तालाबों में चलाया स्वच्छता अभियान


रिपोर्ट - मोहम्मद सईद पठान 

संतकबीरनगर। सावन के तीसरे सोमवार के उपरांत संतकबीरनगर पुलिस ने कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी से आगे बढ़कर सामाजिक सरोकार की एक अलग तस्वीर पेश की। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों और पुलिस चौकियों के आसपास स्थित मंदिरों, मंदिर परिसरों तथा समीपवर्ती तालाबों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान पुलिसकर्मी खुद हाथों में झाड़ू लेकर सफाई करते नजर आए।

अभियान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि सावन के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही रहती है। पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और धार्मिक गतिविधियों के बाद मंदिर परिसरों तथा आसपास के सार्वजनिक स्थलों पर कूड़ा-कचरा जमा होने की संभावना रहती है। ऐसे में पुलिस की ओर से सफाई अभियान चलाना महज औपचारिक गतिविधि न होकर सार्वजनिक स्थलों के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।

अपराध नियंत्रण के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

स्वच्छता अभियान के दौरान पुलिसकर्मियों ने मंदिर परिसर, आसपास के क्षेत्रों और तालाब परिसरों में जमा कूड़ा-कचरा हटाया तथा स्थानों को व्यवस्थित किया। खास बात यह रही कि सफाई का जिम्मा केवल किसी बाहरी एजेंसी या सफाईकर्मियों तक सीमित रखने के बजाय पुलिसकर्मियों ने स्वयं इसमें भागीदारी की।

यह पहल पुलिस की पारंपरिक भूमिका की व्यापक तस्वीर सामने रखती है। सामान्य तौर पर पुलिस की पहचान अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी होती है, लेकिन सामाजिक गतिविधियों में पुलिस की भागीदारी जनता के साथ उसके संबंधों को अधिक मानवीय और संवादपरक बनाने में मदद करती है।

“जो हाथ अपराधियों पर शिकंजा कसते हैं, वही हाथ स्वच्छता के लिए झाड़ू भी उठा सकते हैं।” इस अभियान का यही संदेश पुलिस और जनता के बीच संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

धार्मिक स्थलों की स्वच्छता से पर्यावरण संरक्षण तक

मंदिरों के साथ तालाब परिसरों की सफाई अभियान का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा। धार्मिक स्थलों से जुड़े तालाब केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि स्थानीय पर्यावरण और जल संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। इनके आसपास कचरा जमा होना जल स्रोतों की स्वच्छता और पर्यावरण दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।

इस लिहाज से मंदिर परिसर के साथ तालाबों की सफाई को केवल धार्मिक स्थल की सफाई के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह सार्वजनिक स्वच्छता, जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से भी जुड़ा कदम है।

पुलिस-जन संवाद को मजबूती देने की कोशिश

अभियान के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने पुलिसकर्मियों को स्वच्छता कार्य में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेते देखा। इससे पुलिस की छवि केवल कार्रवाई करने वाली संस्था के बजाय जनसेवा में सहभागी संस्था के रूप में भी उभरती है।

हालांकि ऐसे अभियानों की वास्तविक सफलता केवल एक दिन की सफाई से तय नहीं होती। मंदिरों और तालाबों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्थानीय नागरिकों की सहभागिता, नियमित सफाई व्यवस्था और कूड़ा निस्तारण की स्थायी व्यवस्था भी जरूरी है। पुलिस की पहल तभी दीर्घकालिक प्रभाव पैदा कर सकेगी, जब समुदाय भी इसे अपनी जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाए।

‘स्वच्छता से सेवा, सुरक्षा से विश्वास’

संतकबीरनगर पुलिस का यह अभियान संदेश देता है कि वर्दी केवल अधिकार और अनुशासन का प्रतीक नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सेवा का माध्यम भी है। सावन के बाद मंदिरों और तालाब परिसरों की सफाई कर पुलिस ने स्वच्छता, सामाजिक सहभागिता और जनसेवा को सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया है।

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा के मार्गदर्शन में चलाया गया यह अभियान यदि नियमित जनसहभागिता और सतत स्वच्छता गतिविधियों से जोड़ा जाता है, तो इसका प्रभाव केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित न रहकर सार्वजनिक स्वच्छता की व्यापक संस्कृति को मजबूत कर सकता है।

वर्दी में सेवा और हाथों में झाड़ू की यह तस्वीर यही संदेश देती है—पुलिस की जिम्मेदारी सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के साथ खड़े होने से भी पूरी होती है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
Mission Sandesh
Mission Sandesh