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सीएचसी नाथनगर में गंदगी पर डीएम सख्त, ऑपरेशन थियेटर की बदहाल व्यवस्था पर वेतन रोकने के निर्देश



(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

संतकबीरनगर। जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत उस समय सामने आ गई जब जिलाधिकारी आलोक कुमार ने मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नाथनगर का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान ऑपरेशन थियेटर में साफ-सफाई की गंभीर कमी मिलने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित स्टाफ नर्सों के विरुद्ध अग्रिम आदेश तक वेतन बाधित करने के निर्देश दिए। यह कार्रवाई सरकारी अस्पतालों में स्वच्छता और जवाबदेही को लेकर प्रशासन की सख्ती का संकेत मानी जा रही है।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ऑपरेशन थियेटर, पीएनसी वार्ड, एनबीएसयू, ईटीसी और इमरजेंसी वार्ड का जायजा लिया। हालांकि इन वार्डों में उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सेवाओं पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया, लेकिन ऑपरेशन थियेटर की गंदगी ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए।


जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अस्पताल की सीबीसी और सलेक्ट्रा मशीनें पिछले लगभग 15 दिनों से खराब पड़ी हैं। इससे मरीजों को आवश्यक जांच सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को मशीनों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि अस्पताल में उपलब्ध न होने वाली दवाएं मरीजों को जन औषधि केंद्र से ही लिखी जाएं, ताकि कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध हो सकें।

अस्पताल परिसर में मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लैब तक आने-जाने के मार्ग पर इंटरलॉकिंग कराने के लिए खंड विकास अधिकारी को निर्देशित किया गया। वहीं मरीजों के लिए शौचालय व्यवस्था को शीघ्र सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि मरम्मत का भुगतान हो चुका है और एक सप्ताह के भीतर कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो निरीक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया कि अस्पताल में कुछ चिकित्सा सेवाएं संतोषजनक होने के बावजूद आधारभूत सुविधाओं और रखरखाव में गंभीर कमियां बनी हुई हैं। ऑपरेशन थियेटर जैसी संवेदनशील जगह पर गंदगी और आवश्यक जांच मशीनों का कई दिनों तक खराब रहना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे में केवल निरीक्षण और निर्देश पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि तय समय सीमा में कमियों का स्थायी समाधान होता है या नहीं।

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