(Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh)
संतकबीरनगर। साइबर ठग अब नौकरी और भर्ती के नाम पर भी लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। महुली थाना क्षेत्र में टेलीग्राम पर रेलवे भर्ती फॉर्म के नाम से भेजे गए एक लिंक के जरिए एक युवती से कथित तौर पर ₹16 हजार की ठगी का मामला सामने आया। शिकायत के बाद महुली पुलिस और साइबर टीम की कार्रवाई के परिणामस्वरूप पीड़ित परिवार को पूरी धनराशि वापस मिल गई।
पुलिस के अनुसार, ग्राम सिक्टहा निवासी कृष्णामती पत्नी हरिश्चन्द्र ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी टेलीग्राम पर मिले रेलवे फॉर्म के लिंक के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कर रही थी। इसी दौरान अज्ञात व्यक्ति ने फॉर्म की फीस के नाम पर उससे ₹16,000 का भुगतान करा लिया। बाद में ठगी का एहसास होने पर पीड़िता ने पुलिस से सहायता मांगी।
शिकायत के करीब एक माह बाद वापस मिली पूरी रकम
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में 23 अगस्त 2026 को शिकायत प्राप्त हुई थी। इसके बाद थाना महुली पुलिस और साइबर टीम ने संबंधित बैंकिंग एवं तकनीकी माध्यमों से कार्रवाई शुरू की। लगातार प्रयासों के बाद 27 सितंबर 2026 को ₹16,000 की पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस कराई गई।
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि साइबर ठगी में समय पर शिकायत दर्ज कराना रकम की रिकवरी की संभावना के लिए अहम माना जाता है। हालांकि, हर मामले में धनराशि वापस मिलना सुनिश्चित नहीं होता। ऐसे में ऑनलाइन ठगी के तुरंत बाद शिकायत करना सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है।
रेलवे भर्ती के नाम पर फर्जी लिंक से सावधानी जरूरी
इस मामले का दूसरा पहलू ऑनलाइन रोजगार और भर्ती के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े से जुड़ा है। टेलीग्राम, व्हाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकारी नौकरी अथवा भर्ती परीक्षा के नाम से लिंक भेजकर रजिस्ट्रेशन फीस, दस्तावेज सत्यापन शुल्क या अन्य भुगतान कराने के मामले सामने आते रहे हैं।
ऐसे में किसी भी भर्ती के लिए भुगतान करने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर विज्ञापन और आवेदन प्रक्रिया की पुष्टि करना जरूरी है। केवल सोशल मीडिया पर मिले लिंक को देखकर भुगतान करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
पुलिस की अपील—लिंक खोलने से पहले करें सत्यापन
साइबर ठगी से बचने के लिए संतकबीरनगर पुलिस ने लोगों से अज्ञात लिंक, कॉल और संदेशों से सावधान रहने की अपील की है। पुलिस के अनुसार किसी भी व्यक्ति के साथ बैंक संबंधी जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड अथवा यूपीआई पिन साझा नहीं करना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति रिश्तेदार या परिचित बनकर अचानक पैसे की मांग करता है तो भुगतान करने से पहले उसकी पहचान किसी विश्वसनीय माध्यम से सुनिश्चित करनी चाहिए।
साइबर ठगी होने पर पीड़ित को बिना देरी 1930 साइबर हेल्पलाइन पर सूचना देने अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।
कार्रवाई करने वाली टीम
पुलिस के अनुसार कार्रवाई में थानाध्यक्ष दुर्गेश पाण्डेय, साइबर प्रभारी महुली उपनिरीक्षक अनुज कुमार यादव, कांस्टेबल अंकित पटेल, सोनू यादव और मनोज यादव शामिल रहे।
विश्लेषण: इस घटना में पुलिस द्वारा पूरी ₹16 हजार की रकम वापस कराना राहत की बात है, लेकिन मामला यह भी दिखाता है कि साइबर ठगी का तरीका लगातार बदल रहा है। नौकरी और सरकारी भर्ती जैसे भरोसेमंद विषयों का इस्तेमाल करके लोगों को फर्जी लिंक तक पहुंचाना ठगों की रणनीति का हिस्सा बन सकता है। इसलिए किसी भी ऑनलाइन आवेदन या भुगतान से पहले आधिकारिक स्रोत की पुष्टि करना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

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