(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। जिले में अवैध कच्ची शराब के निर्माण और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को धनघटा क्षेत्र के ग्राम घोरांग में आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने दबिश दी। विभाग के अनुसार कार्रवाई के दौरान करीब 200 किलो महुआ लहन मौके पर नष्ट कराया गया, जबकि 3 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की गई।
आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-3 धनघटा राज किशोर पटेल के नेतृत्व में आबकारी स्टाफ तथा लोहरैया पुलिस चौकी प्रभारी मुकेश कुमार गुप्ता के साथ पुलिस टीम ने यह कार्रवाई की। विभागीय जानकारी के मुताबिक बरामदगी के आधार पर आबकारी अधिनियम के तहत एक अभियोग पंजीकृत किया गया है।
200 किलो लहन मिला तो सवाल सिर्फ 3 लीटर शराब का नहीं
कार्रवाई में 200 किलो महुआ लहन का नष्ट किया जाना इस बात की ओर संकेत करता है कि संबंधित स्थान पर कच्ची शराब तैयार करने के लिए सामग्री मौजूद थी। हालांकि, विभागीय सूचना में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह लहन किस स्थान से मिला, इसके पीछे कौन लोग सक्रिय थे और मौके से किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई या नहीं।
यही बिंदु अवैध शराब के खिलाफ प्रवर्तन अभियान की वास्तविक प्रभावशीलता को परखने के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। केवल लहन नष्ट करने और सीमित मात्रा में शराब बरामद करने से क्या अवैध शराब निर्माण की पूरी कड़ी तक पहुंच बनाई जा रही है या कार्रवाई मुख्यतः मौके पर मौजूद सामग्री तक सीमित रह जाती है—यह सवाल निगरानी और आगे की जांच से जुड़ा है।
आबकारी दुकानों की भी जांच, गंभीर अनियमितता नहीं मिली
संयुक्त कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग की टीम ने हैसर बाजार और टांडा क्षेत्र की आबकारी दुकानों का निरीक्षण भी किया। विभाग के मुताबिक जांच के दौरान कोई गंभीर अनियमितता नहीं पाई गई।
दुकानों के निरीक्षण के संबंध में विभाग ने यह भी कहा है कि जांच का क्रम आगे भी जारी रहेगा। ऐसे में नियमित निरीक्षण का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई केवल ग्रामीण इलाकों में कच्ची शराब बनाने वालों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि लाइसेंसी दुकानों पर बिक्री, स्टॉक, अभिलेख और निर्धारित नियमों के अनुपालन की भी लगातार निगरानी जरूरी है।
कार्रवाई के साथ निरंतर निगरानी भी जरूरी
अवैध शराब का कारोबार अक्सर केवल निर्माण स्थल तक सीमित नहीं रहता। इसके पीछे कच्चे माल की उपलब्धता, निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री जैसी अलग-अलग कड़ियां हो सकती हैं। इसलिए 200 किलो लहन का मिलना प्रवर्तन एजेंसियों के लिए केवल एक कार्रवाई का आंकड़ा नहीं, बल्कि यह पता लगाने का अवसर भी है कि इस तरह की गतिविधि वहां तक कैसे पहुंची और क्या क्षेत्र में इसके अन्य संभावित ठिकाने भी हैं।
विशेष प्रवर्तन अभियान की सफलता का आकलन केवल कितनी मात्रा में लहन नष्ट किया गया या कितने लीटर शराब बरामद हुई, इससे नहीं बल्कि इस बात से भी किया जाना चाहिए कि कार्रवाई के बाद संबंधित क्षेत्र में अवैध शराब निर्माण की पुनरावृत्ति कितनी रोकी जा सकी।
फिलहाल आबकारी विभाग ने कार्रवाई जारी रखने की बात कही है। आने वाले दिनों में होने वाली लगातार जांच और प्रवर्तन कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि यह अभियान अवैध कच्ची शराब के स्थानीय नेटवर्क पर कितना स्थायी प्रभाव डाल पाता है।
मिशन संदेश | संतकबीरनगर
नोट: उपरोक्त कार्रवाई और बरामदगी संबंधी तथ्य आबकारी विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं।


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