(Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh)
संतकबीरनगर। थाना महुली क्षेत्र के भटौरा गांव में वर्ष 2019 में हुई मारपीट और महिला को घायल करने के मामले में करीब सात वर्ष बाद अदालत का फैसला आया है। एएसजे प्रथम, संतकबीरनगर की अदालत ने चार अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 308 सहित अन्य धाराओं में दोषसिद्ध करते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के तहत गुणवत्तापूर्ण विवेचना और प्रभावी अभियोजन पैरवी का परिणाम है।
खेत में काम करने को लेकर हुआ था विवाद
मामला 3 जुलाई 2019 का है। पुलिस के मुताबिक भटौरा निवासी नरसिंह गुप्ता ने थाना महुली में शिकायत दर्ज कराई थी कि खेत में काम करने को लेकर हुए विवाद के दौरान उनकी पत्नी के सिर पर लाठी-डंडों से वार कर उन्हें घायल किया गया।
शिकायत के आधार पर थाना महुली में मु0अ0सं0 224/2019 के तहत धारा 308, 323, 504 और 506 भादवि में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना उपनिरीक्षक मनोज कुमार त्रिपाठी द्वारा की गई और पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
चार अभियुक्तों को अदालत ने सुनाई सजा
पुलिस के अनुसार अदालत ने मामले में गंगा सरन राय, अमेरिका राय उर्फ अम्बिका उर्फ भोले राय, अंकित राय और जीत बहादुर राय, सभी निवासी भटौरा, को दोषसिद्ध किया।
धारा 308 भादवि के तहत चारों को चार-चार वर्ष के कठोर कारावास और 5,000-5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना न देने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
इसके अतिरिक्त धारा 323 में एक वर्ष का कठोर कारावास व 1,000 रुपये जुर्माना, धारा 506 में एक वर्ष का कठोर कारावास व 1,000 रुपये जुर्माना तथा धारा 504 में छह माह का कठोर कारावास व 500 रुपये जुर्माना लगाया गया है। इन अर्थदंडों का भुगतान न करने की स्थिति में संबंधित अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान है।
इस प्रकार चारों अभियुक्तों पर मुख्य धाराओं के तहत कुल 30,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
सात साल बाद फैसला, पैरवी की प्रभावशीलता पर भी नजर
पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी और विवेचना के आधार पर दोषसिद्धि सुनिश्चित हुई। हालांकि, यह मामला वर्ष 2019 से लंबित था और फैसला सितंबर 2026 में आया, यानी न्यायिक प्रक्रिया में करीब सात वर्ष का समय लगा।
दोषसिद्धि पुलिस की जांच और अभियोजन की कार्रवाई का महत्वपूर्ण परिणाम है, लेकिन ऐसे मामलों में यह सवाल भी महत्वपूर्ण रहता है कि पुराने मुकदमों के त्वरित निस्तारण और पीड़ित पक्ष को समय पर न्याय दिलाने के लिए व्यवस्था को और कितना प्रभावी बनाया जा सकता है।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत केवल सजा का आंकड़ा बढ़ना ही नहीं, बल्कि मजबूत विवेचना, साक्ष्यों की गुणवत्ता, प्रभावी अभियोजन और मामलों के समयबद्ध निस्तारण की निरंतरता भी इसकी वास्तविक प्रभावशीलता का महत्वपूर्ण पैमाना होगी।

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