- जनसंख्या गणना के दूसरे चरण में व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक और जातिगत विवरण जुटाने की तैयारी; डिजिटल व्यवस्था के कारण सटीकता और गोपनीयता भी बड़ी चुनौती
(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। भारत की जनगणना-2027 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अब अगले महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई हैं। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) एवं जिला जनगणना अधिकारी सत्य प्रकाश की अध्यक्षता में प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के तकनीकी प्रशिक्षण की कार्यशाला आयोजित की गई। बैठक में अधिकारियों को जनसंख्या गणना के दौरान निर्धारित प्रक्रिया, जिम्मेदारियों और तकनीकी व्यवस्था के अनुरूप काम करने के निर्देश दिए गए।
जनगणना महज आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं है। इससे तैयार होने वाले आंकड़े आने वाले वर्षों में सरकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण और सामाजिक-आर्थिक नीतियों के लिए आधार बनेंगे। ऐसे में इस बार की जनगणना में डिजिटल डेटा संग्रह और जातिगत आंकड़ों को शामिल किया जाना इसे पहले की जनगणनाओं से अलग बनाता है। केंद्र सरकार के अनुसार Census 2027 भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी और जनसंख्या गणना के चरण में जातियों की गणना भी की जाएगी।
40 सवालों के जरिए जुटाई जाएगी विस्तृत जानकारी
प्रशिक्षण में जिला प्रभारी जनगणना सुजीत कुमार ने जनगणना निदेशालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया और जनसंख्या गणना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। जिला प्रशासन के अनुसार दूसरे चरण में कुल 40 प्रश्नों के माध्यम से नागरिकों से व्यक्तिगत जानकारी के साथ शिक्षा, रोजगार, भाषा, प्रवास, विकलांगता, धर्म और जाति संबंधी विवरण जुटाया जाएगा।
जातिगत आंकड़ों का शामिल होना इस जनगणना का एक महत्वपूर्ण नया पहलू है। केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को Census 2027 में जाति गणना शामिल करने का निर्णय लिया था। आधिकारिक तौर पर बताया गया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना के अतिरिक्त अन्य जातियों की भी गणना Population Enumeration के दौरान की जाएगी।
कागज से डिजिटल व्यवस्था की ओर बड़ा बदलाव
इस बार जनगणना में मोबाइल आधारित डेटा संग्रह और डिजिटल निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाएगा। केंद्र सरकार के अनुसार Census Management & Monitoring System के जरिए जनगणना की प्रगति और मैदानी गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी। Self-Enumeration की सुविधा भी इस जनगणना में पहली बार उपलब्ध कराई गई है।
डिजिटल व्यवस्था से डेटा संग्रह और निगरानी में तेजी आने की उम्मीद है, लेकिन इसके साथ तकनीकी दक्षता, नेटवर्क संबंधी दिक्कत, सही जानकारी दर्ज करने और नागरिकों के डेटा की गोपनीयता जैसी जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना में एकत्र व्यक्तिगत आंकड़ों की गोपनीयता कानून के तहत संरक्षित है और प्रकाशित होने वाला डेटा समेकित रूप में होता है।
प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर रहेगी असली नजर
प्रशासन ने प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को पूरी तन्मयता एवं संवेदनशीलता के साथ जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जनगणना की गुणवत्ता काफी हद तक मैदानी स्तर पर जानकारी दर्ज करने वाले कर्मियों की समझ और सावधानी पर निर्भर करेगी।
विशेषकर जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार, प्रवास और विकलांगता जैसे संवेदनशील विवरण दर्ज करते समय एक छोटी गलती भी बाद में तैयार होने वाले आंकड़ों की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए केवल प्रशिक्षण आयोजित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि फील्ड में सत्यापन, पर्यवेक्षण और तकनीकी सहायता की प्रभावी व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी होगी।
प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज
कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी/जिला जनगणना अधिकारी सत्य प्रकाश ने सभी प्रगणकों, पर्यवेक्षकों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करने के निर्देश दिए।
बैठक में उप जिलाधिकारी सदर हृदय राम तिवारी, उप जिलाधिकारी धनघटा वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता, उप जिलाधिकारी मेहदावल राजकुमार, तहसीलदार सदर अनुराग यादव, तहसीलदार मेहदावल अल्पिका वर्मा, तहसीलदार धनघटा प्रतिमा मौर्य, प्रशासनिक अधिकारी बद्री प्रसाद श्रीवास्तव, जनगणना सहायक कलेक्ट्रेट अभय कुमार चौधरी, सरफराज अहमद, खंड विकास अधिकारी तथा नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
विश्लेषणात्मक तौर पर देखें तो संतकबीरनगर में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है। जनगणना-2027 के आंकड़े आने वाले वर्षों में विकास योजनाओं और सरकारी नीतियों के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं। इसलिए वास्तविक चुनौती अब यह होगी कि प्रशिक्षण के बाद मैदानी स्तर पर प्रत्येक परिवार और व्यक्ति की जानकारी कितनी सटीक, पूर्ण, निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से दर्ज की जाती है।

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