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निजी वाहन मालिकों के लिए बड़ी खबर: सालाना फिटनेस को लेकर बदल गया नियम, 3481 वाहन होंगे प्रभावित


(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

संतकबीरनगर। चालक को छोड़कर छह से अधिक सीट क्षमता वाले कुछ निजी वाहनों के मालिकों को अब हर वर्ष फिटनेस कराने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी। परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश के निर्देश के क्रम में लागू किए गए इस बदलाव को निजी वाहन स्वामियों के लिए प्रक्रिया सरल करने वाला कदम माना जा रहा है।

एआरटीओ प्रियवंदा सिंह के अनुसार, पूर्व व्यवस्था में चालक को छोड़कर छह से अधिक सीट क्षमता वाले निजी वाहनों की प्रत्येक वर्ष फिटनेस कराना अनिवार्य था। इसके चलते व्यक्तिगत और पारिवारिक उपयोग में आने वाले ऐसे वाहनों के मालिकों को भी हर साल फिटनेस प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी।

नई व्यवस्था के बाद संबंधित श्रेणी में आने वाले निजी वाहनों के स्वामियों को वार्षिक फिटनेस की बाध्यता से राहत मिलेगी। इससे न केवल परिवहन कार्यालय की बार-बार की जाने वाली प्रक्रिया से छुटकारा मिलेगा, बल्कि समय और खर्च की भी बचत होगी।

बस्ती मंडल में 3,481 वाहन होंगे प्रभावित

परिवहन विभाग के अनुसार बस्ती मंडल के तीनों जनपदों में इस श्रेणी के कुल 3,481 निजी वाहन पंजीकृत हैं। इनमें बस्ती में 1,737, सिद्धार्थनगर में 685 और संतकबीरनगर में 1,059 वाहन शामिल हैं।

संतकबीरनगर में ही एक हजार से अधिक वाहन इस बदलाव से प्रभावित होंगे। ऐसे वाहन मालिकों के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें अब हर वर्ष फिटनेस प्रक्रिया के लिए परिवहन कार्यालय से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने की जरूरत नहीं होगी।

राहत के साथ नियमों की सीमा समझना भी जरूरी

इस फैसले को निजी वाहन स्वामियों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इसका अर्थ सभी प्रकार के वाहनों को फिटनेस संबंधी नियमों से मुक्त किया जाना नहीं है। यह व्यवस्था संबंधित श्रेणी के निजी वाहनों तक सीमित है।

परिवहन या व्यावसायिक वाहनों तथा उन वाहनों पर, जिनके लिए अलग से फिटनेस, परमिट या अन्य वैधानिक प्रावधान लागू हैं, संबंधित नियम पहले की तरह लागू रहेंगे।

व्यवस्था में बदलाव से वाहन मालिकों की कागजी और समय संबंधी परेशानी कम होना स्वाभाविक है, लेकिन वाहन की तकनीकी स्थिति और सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी वाहन मालिक की बनी रहती है। ऐसे में वार्षिक फिटनेस की बाध्यता समाप्त होने के बावजूद निजी वाहन की ब्रेक, टायर, लाइट, स्टीयरिंग और अन्य सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।

कुल मिलाकर परिवहन विभाग का यह निर्णय उन निजी वाहन स्वामियों के लिए प्रक्रियागत राहत लेकर आया है, जिनके वाहन नई व्यवस्था के दायरे में आते हैं। अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की होगी कि नियमों में मिली प्रशासनिक राहत का लाभ वाहन मालिकों को स्पष्ट रूप से मिले और सड़क सुरक्षा से जुड़े बुनियादी मानकों के प्रति भी जागरूकता बनी रहे।

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