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संतकबीरनगर: साइबर ठगी में ₹36,498 गंवाने वाले पीड़ित को राहत, दुधारा पुलिस ने पूरी रकम कराई वापस



(रिपोर्ट मोहम्मद सईद पठान एडिटर मिशन संदेश हिंदी समाचार पत्र)

संतकबीरनगर। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच समय पर शिकायत दर्ज कराने की अहमियत एक बार फिर सामने आई है। थाना दुधारा क्षेत्र में एक व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड से साइबर ठगी के जरिए निकाली गई ₹36,498 की पूरी धनराशि पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद वापस करा दी गई।

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में चलाए जा रहे “क्रैक साइबर क्राइम” अभियान के तहत थाना दुधारा की साइबर हेल्प डेस्क/साइबर सेल ने संबंधित बैंक और वित्तीय संस्थानों से समन्वय कर रकम को सुरक्षित कराने की कार्रवाई की।

संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना पड़ा महंगा

पुलिस के अनुसार, बसडीला निवासी मसऊद रजा पुत्र महबूब रजा ने 1 सितंबर 2026 को साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक उन्होंने एक अज्ञात लिंक पर क्लिक कर क्रेडिट कार्ड से संबंधित जानकारी दर्ज कर दी। इसके बाद उनके खाते से ₹36,498 का अनधिकृत भुगतान हो गया।

घटना की जानकारी होने के बाद पीड़ित ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही दुधारा पुलिस की साइबर हेल्प डेस्क ने संबंधित बैंक एवं वित्तीय संस्थानों से संपर्क कर रकम को होल्ड कराने और वापस दिलाने के लिए पैरवी शुरू की।

पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के परिणामस्वरूप पीड़ित की पूरी ठगी गई धनराशि उसके खाते में वापस करा दी गई।

राहत मिली, लेकिन घटना ने फिर उठाया सतर्कता का सवाल

पुलिस की कार्रवाई से पीड़ित को आर्थिक राहत जरूर मिली, लेकिन यह घटना साइबर सुरक्षा को लेकर आम लोगों की जागरूकता पर भी सवाल खड़े करती है। आज साइबर ठग बैंक, क्रेडिट कार्ड, केवाईसी, इनाम, नौकरी, बिजली बिल और अन्य सेवाओं के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर लोगों से संवेदनशील जानकारी हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

एक छोटी सी लापरवाही—जैसे संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना या बैंकिंग जानकारी साझा करना—सीधे आर्थिक नुकसान में बदल सकती है।

हालांकि इस मामले में पीड़ित द्वारा समय रहते 1930 पर शिकायत करना महत्वपूर्ण साबित हुआ। इससे यह स्पष्ट होता है कि साइबर फ्रॉड होने के बाद घबराने या चुप बैठने के बजाय तत्काल शिकायत करना रकम को बचाने की संभावना बढ़ा सकता है।

पुलिस की कार्रवाई की असली कसौटी समय पर राहत

साइबर अपराध में कार्रवाई पारंपरिक अपराधों से अलग होती है। रकम कई खातों या डिजिटल माध्यमों से तेजी से स्थानांतरित हो सकती है। ऐसे में पुलिस, बैंक और वित्तीय संस्थानों के बीच त्वरित समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है।

दुधारा पुलिस की इस कार्रवाई में पीड़ित की पूरी धनराशि वापस कराना निश्चित रूप से राहत देने वाला परिणाम है। लेकिन साइबर अपराध की चुनौती इतनी बड़ी है कि केवल रकम वापस कराने के मामलों को सफलता मानने के साथ-साथ रोकथाम और जनजागरूकता पर भी लगातार जोर देना जरूरी है।

पुलिस टीम ने की कार्रवाई

रकम की रिकवरी/होल्ड कराने की कार्रवाई में थानाध्यक्ष अमित कुशवाहा, उपनिरीक्षक अनिल मिश्रा (प्रभारी साइबर सेल), कांस्टेबल ऋषिकेश यादव, कांस्टेबल अनुज कुमार, रिक्रूट कांस्टेबल हर्ष सिंह और महिला रिक्रूट कांस्टेबल एकता सिंह शामिल रहे।

पीड़ित ने धनराशि वापस मिलने पर उत्तर प्रदेश पुलिस और थाना दुधारा की साइबर हेल्प डेस्क टीम के प्रति आभार जताया।

जनता के लिए जरूरी सावधानी

साइबर ठगी से बचने के लिए किसी अनजान व्यक्ति के फोन, संदिग्ध लिंक, फर्जी ऑफर या परिचित बनकर की गई धनराशि की मांग पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। बैंक, क्रेडिट कार्ड, ओटीपी, पासवर्ड अथवा अन्य संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

अगर साइबर ठगी हो भी जाए तो देर न करें—तुरंत 1930 पर कॉल करें और Cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

मिशन संदेश | संतकबीरनगर
साइबर अपराध में सावधानी ही सबसे पहली सुरक्षा है।

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