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कालबाधित विवेचनाओं पर एसपी संदीप कुमार मीना का कड़ा रुख, 4 विवेचकों का वेतन रोका और 4 पर प्रारंभिक जांच के आदेश


Report- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh Hindi News Paper 

संतकबीरनगर । जिले में लंबित मुकदमों की विवेचना को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराने के लिए पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने बुधवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित अर्दली रूम में लंबित मामलों की गहन समीक्षा की। खास तौर पर 60 और 90 दिवस की कालबाधित विवेचनाओं को लेकर एसपी ने सख्त रुख अपनाते हुए लापरवाही पाए जाने पर चार विवेचकों का सितंबर 2026 का वेतन रोकने का आदेश दिया, जबकि चार अन्य विवेचकों के विरुद्ध प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए गए।

अर्दली रूम में क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय और क्षेत्राधिकारी मेंहदावल सर्व दवन सिंह समेत संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

डकैती से लेकर वाहन चोरी तक मामलों की हुई समीक्षा

पुलिस अधीक्षक ने संपत्ति संबंधी अपराधों से जुड़े लंबित और आंशिक रूप से विवेचित मामलों की प्रकरणवार समीक्षा की। इनमें डकैती, लूट, छिनैती, नकबजनी, वाहन चोरी और अन्य चोरी से संबंधित मामले शामिल रहे।

समीक्षा के दौरान संबंधित विवेचक, क्षेत्राधिकारी पेशी कार्यालय के हेड पेशी, अपराध शाखा के संबंधित कर्मचारी तथा थानों के हेड मुहर्रिर अपराध रजिस्टर के साथ मौजूद रहे। एसपी ने प्रत्येक मामले में अब तक हुई कार्रवाई और विवेचना की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली।

60 और 90 दिन से लंबित मामलों पर विशेष फोकस

अर्दली रूम में सबसे अधिक जोर उन मामलों पर रहा, जिनकी विवेचना 60 या 90 दिन की निर्धारित अवधि पार कर चुकी है। एसपी ने प्रत्येक मामले में अब तक जुटाए गए साक्ष्य, आरोपियों की गिरफ्तारी की स्थिति, की गई कानूनी कार्रवाई और विवेचना लंबित रहने के कारणों की जानकारी ली।

समीक्षा में जहां अपेक्षित प्रगति नहीं मिली, वहां एसपी ने संबंधित विवेचकों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। पुलिस विभाग के अनुसार कुछ मामलों में विवेचना में लापरवाही और अनावश्यक देरी सामने आने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

चार विवेचकों का सितंबर का वेतन रोकने का आदेश

विवेचना में अपेक्षित प्रगति नहीं पाए जाने और लापरवाही के मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक ने चार संबंधित विवेचकों का सितंबर 2026 का वेतन रोकने का आदेश दिया।

वहीं, चार अन्य विवेचकों के विरुद्ध प्रारंभिक जांच खोलने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जांच के दौरान यह पता लगाएं कि विवेचना में देरी किन परिस्थितियों में हुई और संबंधित विवेचक की भूमिका एवं जिम्मेदारी क्या रही।

एसपी ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जांच में यदि लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

'लापरवाही और अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं'

पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों और विवेचकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि विवेचना में किसी भी तरह की शिथिलता, लापरवाही या अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। कालबाधित मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने उपलब्ध साक्ष्यों का निष्पक्ष, वैज्ञानिक और विधिसम्मत परीक्षण करने तथा प्रत्येक मामले में गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करने को कहा। जिन मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी बाकी है, उनमें प्रभावी प्रयास कर शीघ्र गिरफ्तारी करने के भी निर्देश दिए गए।

क्षेत्राधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी

एसपी ने सभी क्षेत्राधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में 60 और 90 दिवस से लंबित विवेचनाओं की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। प्रत्येक मामले में घटना का विवरण, अब तक हुई कार्रवाई, गिरफ्तारी की स्थिति, कानूनी कार्रवाई और विवेचना लंबित रहने का स्पष्ट कारण अद्यतन रखने को कहा गया।

उन्होंने अभिलेखों के व्यवस्थित रखरखाव के साथ-साथ प्रत्येक मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने पर भी जोर दिया।

समीक्षात्मक नजरिया: सिर्फ वेतन रोकने से नहीं, निगरानी की निरंतरता से सुधरेगी व्यवस्था

एसपी की कार्रवाई से स्पष्ट है कि संतकबीरनगर पुलिस अब लंबित विवेचनाओं को लेकर जवाबदेही तय करने की दिशा में सख्त रुख अपना रही है। चार विवेचकों का वेतन रोकना और चार के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश यह संदेश देते हैं कि लंबे समय तक मामलों को लंबित रखना अब महज प्रशासनिक कमी नहीं माना जाएगा।

हालांकि, लंबित विवेचनाओं का बोझ कम करने के लिए केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। विवेचकों पर मामलों की संख्या, तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता, वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने में आने वाली कठिनाइयों और अभियोजन से समन्वय जैसे व्यावहारिक पहलुओं की भी नियमित समीक्षा जरूरी है।

सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि बुधवार की समीक्षा के बाद कालबाधित मामलों की प्रगति की फॉलोअप मॉनिटरिंग कितनी प्रभावी रहती है। यदि प्रत्येक लंबित मामले के लिए स्पष्ट समयसीमा, जिम्मेदार अधिकारी और नियमित समीक्षा की व्यवस्था कायम रहती है, तो इसका सीधा असर पुलिस की विवेचना व्यवस्था और न्यायालय में मामलों के प्रभावी अभियोजन पर पड़ सकता है।

एसपी संदीप कुमार मीना का संदेश स्पष्ट है—विवेचना में देरी और लापरवाही को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। लेकिन इस सख्ती का वास्तविक मूल्यांकन लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण और पीड़ितों को समय पर न्याय मिलने के परिणामों से ही होगा।

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