सीडीओ की अध्यक्षता में तैयारियों की समीक्षा, माइक्रो प्लान के साथ जमीनी निगरानी और विभागीय समन्वय पर जोर
Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
खलीलाबाद संतकबीरनगर, । जिले में संचारी रोगों और दिमागी बुखार की रोकथाम के लिए अक्टूबर माह में विशेष अभियान चलाया जाएगा। कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई अन्तर्विभागीय समन्वय समिति की बैठक में अभियान की तैयारियों, विभागीय जिम्मेदारियों और जमीनी स्तर पर निगरानी की समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामानुज कनौजिया सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
01 से 31 अक्टूबर तक संचारी रोग नियंत्रण अभियान और 12 से 31 अक्टूबर तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन का जोर केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित रहने के बजाय घर-घर निगरानी, संभावित मरीजों की पहचान, साफ-सफाई और समय से उपचार तक व्यवस्था को जोड़ने पर है।
तीन चरणों में क्या है अभियान की चुनौती?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में अप्रैल और जुलाई में विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के चरण आयोजित किए जा चुके हैं। अब अक्टूबर का अभियान तीसरा चरण होगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि पिछले अभियानों में चिन्हित कमियों और संवेदनशील क्षेत्रों पर इस बार कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है।
दस्तक अभियान के दौरान आशा कार्यकत्री, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मी घर-घर पहुंचकर एई/जेई तथा बुखार के संभावित मरीजों की पहचान करेंगे। तेज बुखार वाले मरीजों को आवश्यकता के अनुसार 102/108 एंबुलेंस के माध्यम से नजदीकी सीएचसी या पीएचसी भेजने की व्यवस्था बताई गई है।
इसके साथ ही घरों में कूलर, पुराने बर्तन, गमले, टायर, फ्रिज की ट्रे और पानी जमा करने वाले पात्रों की जांच कर लोगों को मच्छरजनित एवं अन्य संचारी रोगों से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान की सफलता स्वास्थ्य विभाग के अकेले प्रयासों से संभव नहीं है। बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पंचायतीराज, नगर निकाय, कृषि, पशुपालन समेत विभिन्न विभागों को अपने-अपने दायित्वों के साथ अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
नगर क्षेत्रों में नालियों की सफाई, अपशिष्ट जल की निकासी, सफाई व्यवस्था और फॉगिंग पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधानों और निगरानी समितियों के माध्यम से घर-घर जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
विद्यालयों में भी बच्चों को संचारी रोगों से बचाव और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग को दी गई है।
माइक्रो प्लान और फीडबैक पर सीडीओ का जोर
मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी ने सभी चिकित्सा अधिकारियों को अपने-अपने विकासखंडों में बैठक कर माइक्रो प्लान के आधार पर अभियान संचालित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों की गतिविधियों की नियमित निगरानी, आशा डायरी और रूटीन रजिस्टर के निरीक्षण तथा गांवों में जाकर कार्यों का सत्यापन करने को कहा।
महत्वपूर्ण रूप से उन्होंने आम जनता से फीडबैक लेने पर भी जोर दिया। किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही मिलने पर संबंधित कर्मी के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
असली परीक्षा घर-घर पहुंचने के बाद होगी
सरकारी अभियानों में तैयारियों और बैठकों की तस्वीर सामने आना सामान्य बात है, लेकिन संचारी रोग नियंत्रण अभियान की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन मैदानी स्तर पर घर-घर पहुंचने, संदिग्ध मरीजों की समय से पहचान, जलजमाव और मच्छरों के स्रोतों पर कार्रवाई तथा उपचार तक मरीजों की पहुंच से होगा।
खासकर संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। अब निगरानी व्यवस्था कितनी नियमित रहती है और विभिन्न विभाग अपने निर्धारित दायित्वों को कितनी गंभीरता से निभाते हैं, यही अक्टूबर अभियान की जमीनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार होगा।
बैठक में जिला विकास अधिकारी रुक्मणी वर्मा, सीएमएस डॉ. रमाशंकर सिंह, एसीएमओ डॉ. राम रतन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसके तिवारी, जिला पंचायत राज अधिकारी अरुण कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी सुजीत कुमार, जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार सहित नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी, एमओआईसी, डिप्टी सीएमओ और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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