Repoted by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
संतकबीरनगर । बच्चों और किशोरियों की सुरक्षा केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं रह सकती। उन्हें अपने अधिकारों, शिकायत के रास्तों और संभावित खतरों की जानकारी देना भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से पीबी गर्ल्स इंटर कॉलेज, खलीलाबाद में “POCSO एक्ट जागरूकता अभियान एवं बचपन बचाओ, अपने अधिकार जानो” कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश POCSO कृष्ण कुमार पंचम तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनन्या शाह ने छात्राओं को बाल संरक्षण और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। कार्यक्रम का शुभारंभ कृष्ण कुमार पंचम ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या सुमन त्रिपाठी भी मौजूद रहीं।
POCSO कानून की जानकारी के साथ सुरक्षा के व्यावहारिक तरीके
कार्यक्रम में छात्राओं को POCSO एक्ट-2012 के प्रमुख प्रावधानों के साथ बच्चों के कानूनी अधिकार, गुड टच-बैड टच, साइबर अपराधों से बचाव तथा किसी भी तरह के शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में तत्काल आवाज उठाने के बारे में बताया गया।
विशेष न्यायाधीश POCSO कृष्ण कुमार ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने छात्राओं से किसी अप्रिय घटना को छिपाने के बजाय माता-पिता, शिक्षक या किसी जिम्मेदार व्यक्ति को तत्काल जानकारी देने की अपील की।
वहीं, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनन्या शाह ने निःशुल्क विधिक सहायता और कानूनी संरक्षण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं से अपने अधिकारों को समझने और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी सहायता लेने का आह्वान किया।
जागरूकता कार्यक्रम के बाद असली चुनौती क्रियान्वयन की
प्रधानाचार्या सुमन त्रिपाठी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्राओं को अधिकारों के प्रति सजग बनाने के साथ सुरक्षित वातावरण में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा, “बचपन सुरक्षित होगा, तभी भविष्य सुरक्षित होगा।”
कार्यक्रम में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और बाल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी हासिल की।
सवाल सिर्फ जागरूकता का नहीं, सुरक्षा व्यवस्था का भी
समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो POCSO जैसे संवेदनशील कानून पर विद्यालय स्तर पर जागरूकता जरूरी कदम है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता इस बात से तय होगी कि छात्राओं को मिली जानकारी व्यवहार में कितनी उतरती है। क्या छात्राएं शिकायत की प्रक्रिया से वास्तव में परिचित हैं? क्या स्कूल में शिकायत सामने आने पर संवेदनशील और त्वरित व्यवस्था उपलब्ध है? क्या साइबर अपराध और ऑनलाइन उत्पीड़न की शिकायतों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया जाता है?
ऐसे कार्यक्रमों के साथ नियमित जागरूकता, सुरक्षित शिकायत तंत्र और समयबद्ध सहायता सुनिश्चित की जाए तो बाल सुरक्षा की व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम में शिक्षिकाएं अनुराधा, सुमिता, सगुफ्ता, राजमणि, किरण, वंदना, कुसुम यादव, सविता यादव, अल्का श्रीवास्तव, वरिष्ठ लिपिक अजीत, गंगाराम, यशवंत सहित विद्यालय के कर्मचारी उपस्थित रहे।

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