By- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
संतकबीरनगर। दुधारा थाना क्षेत्र में महिला की हत्या के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, अभियुक्त पर महिला की कथित तौर पर गला दबाकर हत्या करने और शव को पोखरे में फेंकने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष पेश करने के लिए रवाना किया गया।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष दुधारा अमित कुशवाहा के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने की।
23 सितंबर को दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस के मुताबिक, दुधारा थाने में मु0अ0सं0 387/2026 के तहत बीएनएस की धारा 103(1) और 238 में मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया कि अभियुक्त पवन कुमार पुत्र बंशीलाल गौड़, निवासी भिउरा, थाना दुधारा ने 04 सितंबर 2026 को उसकी पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी और शव को पोखरे में फेंक दिया।
पुलिस के अनुसार, घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई। 24 सितंबर को ग्राम भिउरा के पास से अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया गया।
एक महीने के अंतराल ने खड़े किए गंभीर सवाल
घटना की कथित तारीख 04 सितंबर और मुकदमा दर्ज होने की तारीख 23 सितंबर बताई गई है। ऐसे में घटना और मुकदमा दर्ज होने के बीच रहे अंतराल की परिस्थितियां भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना की सूचना पुलिस को कब और किन परिस्थितियों में मिली तथा मुकदमा दर्ज होने में इतना समय क्यों लगा।
हत्या जैसे गंभीर अपराध में केवल गिरफ्तारी ही जांच की अंतिम उपलब्धि नहीं है। घटना का कारण, परिस्थितिजन्य एवं वैज्ञानिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और कथित घटना की पूरी कड़ी जांच में महत्वपूर्ण होगी। इन बिंदुओं के आधार पर ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त को नियमानुसार माननीय न्यायालय के समक्ष पेश करने के लिए रवाना किया गया।
गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम
पुलिस टीम में थानाध्यक्ष अमित कुशवाहा, उपनिरीक्षक शोभनाथ और कांस्टेबल दुर्गेश शामिल रहे।
महत्वपूर्ण: अभियुक्त के विरुद्ध लगाए गए आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। गिरफ्तारी को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता; मामले में अंतिम निष्कर्ष साक्ष्यों और न्यायालय की प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

Post a Comment