गोरखपुर। विशेष बच्चों की शैक्षिक और कार्यात्मक क्षमताओं की सही पहचान उनकी शिक्षा को प्रभावी बनाने तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सीआरसी गोरखपुर की ओर से ‘आकलन में विशेष शिक्षक की भूमिका’ विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन सीआरई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय स्तर के 40 पुनर्वास पेशेवरों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम में रिसोर्स पर्सन राजेश कुमार यादव, अमित विश्वकर्मा, सौम्या श्रीवास्तव और संध्या सिंह ने विशेष बच्चों की शिक्षा में आकलन की उपयोगिता तथा विशेष शिक्षकों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की।
वक्ताओं ने बताया कि प्रत्येक विशेष बच्चे की सीखने की क्षमता, व्यवहार, कार्यात्मक दक्षता और शैक्षिक जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे में सभी बच्चों के लिए एक जैसी शिक्षण पद्धति अपनाने के बजाय उनकी व्यक्तिगत क्षमताओं और आवश्यकताओं के अनुरूप योजना तैयार करना जरूरी है। विशेष शिक्षक आकलन के माध्यम से बच्चों की क्षमताओं और चुनौतियों की पहचान करते हैं, जिसके आधार पर उनकी शिक्षा एवं विकास के लिए उपयुक्त कार्ययोजना बनाई जाती है।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि सही आकलन केवल बच्चे की कमियों को पहचानने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी क्षमताओं को समझकर सीखने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का माध्यम भी है। इससे विशेष बच्चों की शैक्षिक प्रगति को दिशा देने और उन्हें अधिकाधिक आत्मनिर्भर बनाने में सहायता मिल सकती है।
सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने कार्यक्रम की सफलता पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पुनर्वास पेशेवरों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन माध्यम से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ऑनलाइन आयोजन से विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों को एक मंच पर जुड़कर विषयगत जानकारी साझा करने का अवसर मिला। कार्यक्रम का संचालन समन्वयक राजेश कुमार यादव ने किया।
समीक्षात्मक दृष्टिकोण-
विशेष बच्चों की समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए केवल शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप आकलन, प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों की उपलब्धता और नियमित प्रगति की समीक्षा भी आवश्यक है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पेशेवरों की समझ विकसित करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, इनका वास्तविक प्रभाव तभी सामने आएगा, जब प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को विद्यालयों और पुनर्वास केंद्रों में व्यावहारिक रूप से लागू किया जाए तथा बच्चों की प्रगति का नियमित मूल्यांकन किया जाए।

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