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संतकबीरनगर: पल्स पोलियो अभियान में काम के बाद भी भुगतान नहीं! जिम्मेदारों की जिम्मेदारी और व्यवस्था पर उठे सवाल

  • 28 जून 2026 को सुपरविजन का कार्य करने के बाद भी भुगतान नहीं मिलने का आरोप, जिलाधिकारी और सीएमओ से हस्तक्षेप की मांग

Report by- Dharmendra Kumar edited by-Mohammad Sayeed Pathan 

सेमरियावां संतकबीरनगर। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरियावां से जुड़े पल्स पोलियो कार्यक्रम में कार्य करने वाले एक कार्यकर्ता ने पारिश्रमिक का भुगतान अब तक नहीं मिलने की शिकायत की है। ग्राम सुल्तानपुर, पोस्ट उसरा शहीद निवासी बाबूलाल ने 29 सितंबर 2026 को प्रार्थना पत्र देकर संबंधित अधिकारियों से बकाया भुगतान शीघ्र कराने की मांग की थी । उनका कहना है कि 28 जून 2026 को आयोजित पल्स पोलियो कार्यक्रम में उन्होंने सुपरविजन का कार्य किया था, लेकिन इसके बदले मिलने वाला पारिश्रमिक अब तक उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है।

बाबूलाल ने अपने प्रार्थना पत्र में दावा किया है कि पल्स पोलियो कार्यक्रम के भुगतान के लिए शासन से बजट प्राप्त होने के बावजूद सुपरवाइजरों और कर्मचारियों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि जिले के अन्य ब्लॉकों में पल्स पोलियो कार्यक्रम से संबंधित भुगतान किया जा चुका है, जबकि उनका भुगतान लंबित है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।

भुगतान में देरी से बढ़ी परेशानी, बार-बार फोन आने का जिक्र

प्रार्थना पत्र में कार्यकर्ता ने बताया है कि भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, पोलियो टीम के सदस्य बार-बार फोन कर रहे हैं, जिससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए भुगतान की प्रक्रिया जल्द पूरी कराने की अपील की है।

पल्स पोलियो अभियान बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के लिए चलाया जाने वाला महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम है। इस अभियान की सफलता में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों, कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजरों की भी अहम भूमिका होती है। ऐसे में अभियान से जुड़े कर्मियों के पारिश्रमिक का समय पर भुगतान होना प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों के मनोबल, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

बजट उपलब्ध होने के दावे पर उठे सवाल, जांच की जरूरत

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि संबंधित कार्यक्रम के भुगतान के लिए बजट उपलब्ध है, जैसा कि शिकायतकर्ता ने दावा किया है, तो फिर पारिश्रमिक का भुगतान लंबित रहने की वजह क्या है? क्या भुगतान से संबंधित औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई हैं, अभिलेखों में कोई कमी है या फिर प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया अटकी हुई है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही स्पष्ट हो सकेगा।

यदि भुगतान में देरी किसी प्रशासनिक या तकनीकी कारण से हो रही है, तो संबंधित अधिकारी को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि कार्यकर्ता को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े। वहीं, यदि भुगतान के लिए आवश्यक सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, तो नियमानुसार बकाया पारिश्रमिक जारी करने की दिशा में कार्रवाई की जानी चाहिए।

जिलाधिकारी और सीएमओ से हस्तक्षेप की मांग

बाबूलाल ने अपने प्रार्थना पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी, संतकबीरनगर को भी भेजी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया है कि पल्स पोलियो कार्यक्रम के पारिश्रमिक भुगतान के मामले में आवश्यक निर्देश जारी कर शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और बकाया भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, यह मामला एक कार्यकर्ता की शिकायत पर आधारित है। भुगतान लंबित रहने के वास्तविक कारण और विभागीय स्तर पर हुई कार्रवाई की पुष्टि संबंधित अधिकारियों के जवाब के बाद ही हो सकेगी।


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