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मानसिक तनाव को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी! न्यायालय में विशेषज्ञों ने बताए स्वस्थ जीवन के जरूरी पहलू



Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh 

संतकबीरनगर। मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर शारीरिक स्वास्थ्य की तुलना में कम महत्व दिया जाता है, जबकि तनाव, नींद की कमी और मनोवैज्ञानिक समस्याएं व्यक्ति की कार्यक्षमता से लेकर निर्णय लेने की क्षमता तक को प्रभावित कर सकती हैं। इसी विषय पर विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 9 अक्टूबर 2026 को जिला न्यायालय सभागार में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सलाह लेने का संदेश दिया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम का संचालन प्राधिकरण की सचिव अनन्या साह ने किया। जनपद न्यायाधीश ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कार्य की व्यस्तता और विभिन्न परिस्थितियों से उत्पन्न तनाव को नजरअंदाज न करने, नियमित व्यायाम करने, पर्याप्त नींद लेने और सकारात्मक दिनचर्या अपनाने पर जोर दिया।

विशेषज्ञों ने तनाव प्रबंधन और स्वास्थ्य पर दी जानकारी

कार्यक्रम में क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. तवांगी मणि शुक्ला ने मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक समस्याओं से जुड़े पहलुओं पर जानकारी साझा की। मनोचिकित्सक डॉ. अमरेंद्र कुमार आनंद ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और तनाव प्रबंधन पर अपने विचार रखे। वहीं, ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एस.पी. सिंह ने शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने के लिए उपयोगी व्यायाम और गतिविधियों के बारे में बताया।

विशेषज्ञों ने नियमित व्यायाम, संतुलित दिनचर्या और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। कार्यक्रम का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना रहा।

जागरूकता कार्यक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल: व्यवहार में कितना उतरेगा संदेश?

मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा और जागरूकता कार्यक्रम जरूरी हैं, लेकिन इनका वास्तविक प्रभाव तभी सामने आता है, जब लोग तनाव के लक्षणों को पहचानने, समय पर सहायता लेने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से परामर्श करने के लिए सहज महसूस करें।

कार्यक्रम में तनाव को नजरअंदाज न करने और विशेषज्ञों की सलाह लेने का संदेश दिया गया। हालांकि, जारी सूचना में कर्मचारियों के लिए नियमित मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, गोपनीय काउंसलिंग सुविधा या भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता के संबंध में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

न्यायालय जैसे कार्यस्थलों पर जिम्मेदारियों और समयबद्ध कार्यों के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील वातावरण बनाए रखना महत्वपूर्ण है। जागरूकता के साथ-साथ परामर्श की सुलभ व्यवस्था और जरूरतमंद लोगों को सहायता उपलब्ध कराने जैसे कदम इस दिशा में उपयोगी हो सकते हैं।

निष्कर्षतः, विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का संदेश देता है। अब महत्वपूर्ण यह है कि जागरूकता केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि दैनिक जीवन और कार्यस्थल की संस्कृति में भी मानसिक स्वास्थ्य को उचित महत्व मिले।

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