Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
संतकबीरनगर। शारदीय नवरात्रि, दुर्गापूजा और दशहरा सहित आगामी त्योहारों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी अनुज मलिक की अध्यक्षता में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला शांति समिति की बैठक हुई। इसमें बिजली, सड़क, साफ-सफाई, विसर्जन मार्ग, अग्नि सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था जैसे मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए। हालांकि, बैठक में तैयारियों की समीक्षा के साथ यह भी अहम है कि इन निर्देशों का धरातल पर कितना पालन होता है।
बैठक में पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना, मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी, अपर जिलाधिकारी सत्य प्रकाश और अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, शांति समिति के सदस्य और दुर्गापूजा मंडलियों के आयोजक मौजूद रहे।
बिजली के तारों से लेकर विसर्जन मार्ग तक पर नजर
जिलाधिकारी अनुज मलिक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दुर्गापूजा पंडालों के आसपास और मूर्ति विसर्जन मार्गों पर ढीले अथवा लटकते बिजली के तारों की जांच कर समय रहते उन्हें ठीक कराया जाए। लोक निर्माण विभाग को विसर्जन मार्गों का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने को कहा गया। वहीं, विसर्जन के रास्तों पर लटकती पेड़ों की डालियों को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई।
नगर पालिका और नगर पंचायतों सहित संबंधित विभागों को बिजली, पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में की गई तैयारियों और स्थानीय शांति समिति की बैठकों की जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
इन निर्देशों से स्पष्ट है कि प्रशासन ने संभावित जोखिम वाले बिंदुओं पर ध्यान देने की बात कही है। लेकिन सुरक्षा की वास्तविक कसौटी केवल निरीक्षण और निर्देश नहीं, बल्कि समय पर सुधार, नियमित निगरानी और आयोजनों के दौरान त्वरित कार्रवाई होगी।
एसपी की चेतावनी: अफवाहों से बचें, नियमों का करें पालन
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने कहा कि त्योहारों के दौरान पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा और सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने स्थानीय लोगों से पुलिस एवं प्रशासन का सहयोग करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा संबंधी आशंका की सूचना नजदीकी पुलिस चौकी, थाने अथवा सीधे पुलिस अधीक्षक को देने की अपील की।
एसपी ने दुर्गापूजा आयोजकों को मूर्तियों की ऊंचाई निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप रखने, डीजे की ऊंचाई और ध्वनि पर नियंत्रण रखने तथा तेज आवाज और कंपन पैदा करने वाली ध्वनि से बचने की हिदायत दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पंडालों में गुणवत्तायुक्त बिजली के तारों और सुरक्षित कनेक्शन का इस्तेमाल करने, अग्निशमन यंत्र, रेत से भरी बाल्टियां और पानी जैसी व्यवस्था रखने तथा सीसीटीवी कैमरे लगाने पर भी जोर दिया गया। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जुलूसों के साथ पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित हो, सार्वजनिक रास्तों पर आवागमन बाधित न हो और जरूरत के अनुसार फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी कराई जाए।
असली सवाल: निर्देशों का पालन कितना प्रभावी होगा?
त्योहारों के दौरान भीड़, बिजली के खुले तार, संकरे रास्ते, तेज ध्वनि और विसर्जन के समय यातायात जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। ऐसे में जिला प्रशासन की जिम्मेदारी केवल बैठक करने तक सीमित नहीं है। यह भी जरूरी है कि संवेदनशील स्थलों की पहचान, पंडालों का सुरक्षा निरीक्षण, अग्निशमन संसाधनों की उपलब्धता और विसर्जन मार्गों की स्थिति की समय रहते पुष्टि की जाए।
साथ ही, आयोजकों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। अफवाहों को रोकने, धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून अपने हाथ में लेने के बजाय पुलिस को सूचना देने से तनाव बढ़ने की आशंका कम हो सकती है।
जिलाधिकारी ने नागरिकों से जनपद की परंपरागत गंगा-जमुनी सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की भावना बनाए रखते हुए त्योहार मनाने की अपील की। अब प्रशासन के सामने चुनौती इन निर्देशों को समयबद्ध तरीके से लागू कराने और पूरे त्योहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की है।
बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रामानुज कनौजिया, प्रभागीय वनाधिकारी हरिकेश यादव, विभिन्न उपजिलाधिकारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, एआरटीओ प्रियंवदा सिंह, नगर निकायों के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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