- संतकबीरनगर में सीडीओ जयकेश त्रिपाठी ने की पर्यावरण, वृक्षारोपण और गंगा समिति के कार्यों की समीक्षा; पौधरोपण की जियोटैगिंग इसी माह पूरी करने के निर्देश
(Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor)
संतकबीरनगर, । बखिरा पर्यटन केंद्र के विकास से लेकर पर्यावरण संरक्षण और नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने तक की योजनाओं की प्रगति पर प्रशासन ने समीक्षा शुरू कर दी है। मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में बखिरा टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर, जिला वृक्षारोपण समिति, जिला पर्यावरण समिति और जिला गंगा समिति से जुड़े कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में जहां पौधरोपण की जियोटैगिंग समय से पूरी करने पर जोर दिया गया, वहीं कचरा प्रबंधन, जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट के निस्तारण, वाहनों से होने वाले प्रदूषण और नदियों में दूषित जल जाने से रोकने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए।
बैठक में सामने आए मुद्दे बताते हैं कि विकास योजनाओं की सफलता केवल लक्ष्य निर्धारित करने से नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन, नियमित निगरानी और समयबद्ध निस्तारण से सुनिश्चित होगी।
33.57 लाख पौधरोपण के लक्ष्य के सापेक्ष जियोटैगिंग पर जोर
जिला वृक्षारोपण समिति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 के तहत संतकबीरनगर में वन विभाग को 14.50 लाख और अन्य विभागों को 19.07 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया था। इस प्रकार कुल लक्ष्य 33.57 लाख पौधों का है।
बैठक में अन्य विभागों की ओर से कराए गए पौधरोपण की जियोटैगिंग की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि जियोटैगिंग का कार्य इसी माह पूरा किया जाए। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच पौधरोपण के सत्यापन को लेकर भी चर्चा हुई।
पौधरोपण अभियान की वास्तविक सफलता केवल लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी उत्तरजीविता और संरक्षण से भी तय होती है। ऐसे में जियोटैगिंग और सत्यापन के साथ पौधों के रखरखाव पर भी प्रभावी निगरानी आवश्यक है, ताकि सरकारी आंकड़ों और धरातलीय स्थिति के बीच अंतर न रहे।
कचरा प्रबंधन और जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट पर प्रशासन की नजर
जिला पर्यावरण समिति की बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुपालन की समीक्षा की गई। स्थानीय निकायों के विभिन्न क्षेत्रों से निकलने वाले नगरीय ठोस कचरे के संग्रहण, परिवहन और अंतिम निस्तारण के लिए सेकेंडरी स्टोरेज सुविधाओं की स्थिति पर चर्चा हुई।
शहरों और कस्बों में कचरे का समय पर उठान तथा वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है। यदि कचरे का उचित प्रबंधन नहीं होता है, तो इससे गंदगी, दुर्गंध और प्रदूषण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में संबंधित निकायों के लिए जरूरी है कि संग्रहण से लेकर अंतिम निस्तारण तक की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए।
बैठक में जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन की भी समीक्षा हुई। मुख्य विकास अधिकारी ने क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बस्ती से जनपद के स्वास्थ्य संस्थानों में निकलने वाले जैव-चिकित्सीय कचरे के पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन और निस्तारण की व्यवस्था की जानकारी ली।
अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से निकलने वाले जैव-चिकित्सीय कचरे का सुरक्षित निस्तारण संक्रमण और पर्यावरणीय जोखिम को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए संबंधित संस्थानों में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर परिवहन विभाग को निर्देश
बैठक में वाहनों से उत्पन्न प्रदूषण से संबंधित बिंदुओं की भी समीक्षा की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने परिवहन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नियमों का अनुपालन, प्रदूषण जांच और संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी महत्वपूर्ण है। हालांकि, बैठक में प्रदूषण के मौजूदा स्तर या कार्रवाई के लिए निर्धारित किसी विशिष्ट समयसीमा का विवरण सामने नहीं आया।
नदियों में दूषित जल जाने से रोकने पर जोर
जिला गंगा समिति की समीक्षा के दौरान जनपद में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाने की स्थिति पर चर्चा हुई। मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिया कि उचित जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और नदियों में प्रदूषित जल जाने से रोका जाए। इसके साथ ही नदियों की साफ-सफाई के लिए चल रहे कार्यों में तेजी लाने को कहा गया।
नदियों को स्वच्छ रखने के लिए केवल सफाई अभियान पर्याप्त नहीं हैं। गंदे पानी के प्रवाह को रोकना, जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करना और सीवेज के उचित उपचार की व्यवस्था विकसित करना भी जरूरी है। ऐसे में संबंधित विभागों के सामने इन निर्देशों को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी होगी।
बखिरा पर्यटन केंद्र में दुकानों की नीलामी और सड़क चौड़ीकरण की तैयारी
बैठक में बखिरा टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर के संचालन और विकास से जुड़े मुद्दे भी उठे। मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी ने बखिरा नगर निकाय के अधिशासी अधिकारी को पर्यटन केंद्र की दुकानों की नीलामी और विद्युत कनेक्शन की प्रक्रिया के संबंध में निर्देशित किया।
इसके अलावा मार्ग चौड़ीकरण के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में तहसीलदार खलीलाबाद को निर्देश दिए गए।
बखिरा पर्यटन केंद्र में दुकानों की नीलामी, बिजली कनेक्शन और सड़क चौड़ीकरण से जुड़ी व्यवस्थाएं आगे बढ़ने पर पर्यटन सुविधाओं के संचालन में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन कार्यों की वास्तविक प्रगति संबंधित प्रक्रियाओं के पूरा होने और सुविधाएं शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
निर्देशों के क्रियान्वयन से तय होगी योजनाओं की सफलता
इस बैठक में वृक्षारोपण, कचरा प्रबंधन, जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट, वाहन प्रदूषण, नदी संरक्षण और पर्यटन विकास जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए, लेकिन इन योजनाओं की सफलता नियमित निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
विशेष रूप से पौधरोपण की जियोटैगिंग, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, नदियों में दूषित जल का प्रवाह रोकने और बखिरा पर्यटन केंद्र की लंबित व्यवस्थाओं पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी हरिकेश यादव, उप जिलाधिकारी खलीलाबाद हृदय राम तिवारी, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार प्रभात द्विवेदी, उपायुक्त उद्योग विनोद कुमार वर्मा, सहायक उपायुक्त उद्योग जितेंद्र कुमार, उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके तिवारी, जिला उद्यान अधिकारी समुद्रगुप्त मल्ल, जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार, एसडीओ विद्युत केएन शुक्ला, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बस्ती के क्षेत्रीय अधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका अवधेश भारती, सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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