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सीएबी से भारतीय मुसलमानों को डरने की जरूरत नहीं-:सैय्यद हसन रिज़वी अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग का बयान


नई दिल्‍ली। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के प्रमुख सैयद गयूरुल हसन रिजवी ने नागरिकता संशोधन कानून ( CAA ) को लेकर खड़े हुए सियासी बवाल के बीच कहा कि यह कानून मुस्लिम विरोधी नहीं है। इसलिए भारतीय मुसलमानों को इस बिल से डरने की जरूरत नहीं है।


उन्‍होंने कहा कि भारतीय मुसलमान घुसपैठिए या शरणार्थी नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार से अपेक्षा है कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लाने पर वह इस बात का ध्यान रखेगी कि भारतीय मुसलमानों को कोई परेशानी नहीं हो।


एनएमसी के अध्‍यक्ष रिजवी ने कहा कि यह कानून अल्पसंख्यक विरोधी नहीं है। पारसी, ईसाई, सिख, जैन और बौद्ध भी अल्पसंख्यक हैं। कुछ राजनीतिक लोग कह रहे हैं कि यह मुस्लिम विरोधी है लेकिन यह मुस्लिम विरोधी नहीं है। भारत के मुसलमानों के बारे में इस विधेयक में कुछ नहीं कहा गया है।


यहां के मुसलमानों को पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुसलमानों से क्या लेना देना है? हम तो भारतीय मुसलमान हैं। भारतीय मुसलमान को डरने और घबराने की जरूरत नहीं है। भारतीय मुसलमानों को इससे कोई खतरा नहीं है। यहां के मुसलमान घुसपैठिए नहीं हैं। यहां का मुसलमान सम्मानित नागरिक है और इसको यहां से निकालने का कोई सवाल नहीं है। गृह मंत्री ने भी यही बात कही है।


CAA का भारी विरोध
बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के मुताबिक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के जो सदस्य 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हैं और जिन्हें अपने देश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना पड़ा है, उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी।


कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दल और कई मुस्लिम संगठन इस विधेयक का यह कहते हुए विरोध कर रहे हैं कि इसमें धार्मिक आधार पर भेदभाव किया गया है।


Represent By-Balram Gangwani


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