स्टांप एवं पंजीयन मंत्री बोले— आमजन को विश्वस्तरीय सुविधाएं देना डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता
लखनऊ,। उत्तर प्रदेश में भूमि एवं संपत्ति पंजीकरण सेवाओं को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक सुविधाओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्टांप तथा पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बुधवार को प्रदेश के 10 नए उप निबंधक कार्यालयों एवं अभिलेखागार भवनों का वर्चुअल माध्यम से शिलान्यास किया।
यह परियोजनाएं मथुरा, कुशीनगर, झांसी, गोण्डा, मुरादाबाद, अमरोहा, सीतापुर, हरदोई, लखनऊ और बाराबंकी जनपदों में स्थापित की जाएंगी। सभी शिलान्यास स्थलों पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अवसर पर मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार रजिस्ट्री कार्यालयों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कर नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नए भवनों के निर्माण से विलेखों के पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी और सरकारी अभिलेखों का सुरक्षित संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नए भवन बनाना नहीं, बल्कि ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करना है जहां आम नागरिकों को पारदर्शी, त्वरित और परेशानी मुक्त सेवाएं मिल सकें। आधुनिक आधारभूत सुविधाओं से लैस रजिस्ट्री कार्यालयों के माध्यम से लोगों का समय बचेगा और कार्य निष्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
वर्चुअल शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान सभी दस जनपदों में अलग-अलग समारोह आयोजित किए गए, जिनमें सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। जनप्रतिनिधियों ने इस पहल को नागरिक सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक ढांचे के सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रदेश में संपत्ति पंजीकरण से जुड़े कार्यालयों का आधुनिकीकरण लंबे समय से आवश्यक माना जा रहा था। पुराने भवनों, सीमित अभिलेख व्यवस्था और बढ़ते कार्यभार के कारण आम लोगों को कई बार असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नए उप निबंधक कार्यालयों और आधुनिक अभिलेखागारों का निर्माण निश्चित रूप से बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा।
हालांकि, केवल नए भवनों का निर्माण पर्याप्त नहीं होगा। डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन, ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार, पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता, पारदर्शी कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण जैसे पहलुओं पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक होगा। यदि भौतिक आधारभूत संरचना के साथ प्रशासनिक सुधार और तकनीकी उन्नयन भी समान गति से आगे बढ़ते हैं, तो यह पहल प्रदेश में रजिस्ट्री व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और जनहितैषी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
(News Source -News of India Edit By-Mohammad)

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