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यूपी में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को नई रफ्तार: 540 दिन की परियोजनाएं अब 200 दिन में पूरी, निवेश और रोजगार को मिला बड़ा बढ़ावा


खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 का असर, 24 नए निवेश प्रस्ताव स्वीकृत, किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 राज्य में निवेश, रोजगार और कृषि आधारित उद्योगों को नई गति देती दिखाई दे रही है। नीति के प्रभाव से परियोजनाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पहले जहां किसी परियोजना को शुरू होने में औसतन 540 दिन लगते थे, वहीं अब यह अवधि घटकर करीब 200 दिन रह गई है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है।

बुधवार को कृषि उत्पादन आयुक्त एवं राज्य स्तरीय इम्पावर्ड समिति (एसएलईसी) के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित 20वीं बैठक में नीति की प्रगति, निवेश प्रस्तावों, सब्सिडी वितरण, रोजगार सृजन तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की समीक्षा की गई।

बैठक में 25 जनपदों के 27 निवेश प्रस्तावों पर विचार किया गया, जिनमें से 24 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। दो प्रस्ताव निरस्त किए गए, जबकि एक प्रस्ताव को आवश्यक शर्तों के साथ स्थगित किया गया। स्वीकृत परियोजनाओं में बेकरी उत्पाद, मल्टीग्रेन फ्लोर मिल, डेयरी प्रसंस्करण, फ्रोजन सब्जियां, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन, पास्ता एवं नूडल्स, नमकीन और पैकेज्ड फूड सहित कई आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना शामिल है।

बैठक में दीपक कुमार ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण नीति किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित करने का प्रभावी माध्यम बन रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निवेशकों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उत्तर प्रदेश देश का प्रमुख निवेश केंद्र बन सके।

उन्होंने विशेष रूप से पूर्वांचल में निवेश बढ़ाने पर जोर देते हुए इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) से मंडल मुख्यालयों पर रोड-शो आयोजित करने तथा स्थानीय और बाहरी उद्यमियों को प्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया।

बैठक में अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा ने बताया कि 18 जून 2026 तक नीति के तहत 1,759 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 540 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि निवेशकों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी करने में पहले 60 से 70 दिन लगते थे, जबकि अब यह प्रक्रिया घटकर मात्र 25 से 27 दिन में पूरी हो रही है।

सरकार की ओर से वित्तीय सहायता भी तेजी से उपलब्ध कराई जा रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से जून 2026 तक 462 परियोजनाओं को लगभग 385.30 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 68 परियोजनाओं को 68.01 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जा चुका है।

बैठक में सफल उद्यमियों के उदाहरण भी प्रस्तुत किए गए। अलीगढ़ की एम.डी. फ्रेश वेज प्राइवेट लिमिटेड को सरकारी सहायता मिलने के बाद कंपनी का वार्षिक कारोबार 61 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और 150 से अधिक लोगों को रोजगार मिला। इसी प्रकार रामपुर की आर.जे. इंडस्ट्रीज को भी करोड़ों रुपये की सहायता से उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सफलता मिली।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के क्रियान्वयन में भी उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी बना हुआ है। वर्ष 2025-26 में 7,273 लाभार्थियों को ऋण उपलब्ध कराया गया, जबकि वर्ष 2026-27 में भी 701 स्वीकृत आवेदनों के साथ प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। प्रयागराज, सुल्तानपुर, फतेहपुर, कानपुर नगर, अंबेडकर नगर, उन्नाव, रायबरेली, गोरखपुर, हरदोई और सिद्धार्थनगर इस योजना के उत्कृष्ट प्रदर्शन वाले जिलों में शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश की खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 के शुरुआती परिणाम यह संकेत देते हैं कि राज्य निवेश प्रक्रियाओं को सरल और उद्योग-अनुकूल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। परियोजनाओं की स्वीकृति और क्रियान्वयन में लगने वाले समय में उल्लेखनीय कमी 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की दिशा में सकारात्मक संकेत है।

हालांकि, नीति की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वीकृत परियोजनाएं समय पर धरातल पर उतरें, किसानों को उनके कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य मिले और स्थानीय युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर पैदा हों। विशेष रूप से पूर्वांचल और अन्य अपेक्षाकृत कम विकसित क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना इस नीति की वास्तविक परीक्षा होगी। यदि सरकार पारदर्शी व्यवस्था, समयबद्ध सब्सिडी और मजबूत बुनियादी ढांचे को बनाए रखती है, तो उत्तर प्रदेश देश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

(News Source -News of India Edit By-Mohammad)

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