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पावर वीडर बना किसानों का साथी, कम समय और कम श्रम में खेती को दे रहा नई रफ्तार



(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

संत कबीर नगर, 17 अगस्त 2026। खेती में लगातार बढ़ती श्रमिक समस्या और कृषि कार्यों की बढ़ती लागत के बीच छोटे एवं मध्यम जोत वाले किसानों के लिए आधुनिक कृषि यंत्र उपयोगी विकल्प बनकर उभर रहे हैं। इसी कड़ी में पावर वीडर/टिलर निराई-गुड़ाई, खेत की तैयारी और कतार वाली फसलों में खरपतवार नियंत्रण जैसे कार्यों को कम समय और कम श्रम में पूरा करने में किसानों की मदद कर रहा है।

कृषि अभियंत्रण के वैज्ञानिक डा. देवेश कुमार के अनुसार पावर वीडर विशेष रूप से सब्जियों, बागवानी फसलों तथा कतार में बोई जाने वाली फसलों के लिए उपयोगी है। मशीन में लगे घूमने वाले ब्लेड मिट्टी की ऊपरी सतह को भुरभुरा करने के साथ खरपतवार नियंत्रण में भी मदद करते हैं। मॉडल और उपलब्ध अटैचमेंट के अनुसार इससे खेत की तैयारी सहित अन्य कृषि कार्य भी किए जा सकते हैं।

मजदूरों पर निर्भरता कम करने में मददगार

कृषि कार्यों में समय पर निराई-गुड़ाई न हो पाने का सीधा असर फसल की वृद्धि और उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में पावर वीडर किसानों को समय पर खरपतवार नियंत्रण करने में मदद करता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार सेल्फ-प्रोपेल्ड पावर वीडर का उपयोग कतार वाली फसलों, सब्जियों और बागवानी फसलों में निराई तथा बीज-शैया तैयार करने जैसे कार्यों में किया जा सकता है।

इसकी कार्यक्षमता मॉडल, खेत की स्थिति और संचालन परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसान को मशीन खरीदते समय केवल कीमत नहीं, बल्कि इंजन क्षमता, कार्यक्षमता, ईंधन खपत, उपलब्ध अटैचमेंट, स्पेयर पार्ट्स और स्थानीय सर्विस सुविधा को भी ध्यान में रखना चाहिए।

25 से 45 हजार रुपये से शुरू हो सकती है कीमत

पावर वीडर की कीमत उसकी हॉर्सपावर क्षमता, ब्रांड, मॉडल और अटैचमेंट के आधार पर अलग-अलग होती है। सामान्य तौर पर छोटे मॉडल लगभग 25 से 45 हजार रुपये के दायरे से शुरू हो सकते हैं, जबकि अधिक क्षमता और अतिरिक्त सुविधाओं वाले मॉडल की कीमत इससे अधिक हो सकती है। इसलिए खरीद से पहले विभिन्न मॉडल और उनकी उपयोगिता की तुलना करना किसानों के लिए बेहतर रहेगा।

खेती के साथ स्वरोजगार का भी अवसर

पावर वीडर केवल खेती की लागत और श्रम आवश्यकता कम करने वाला उपकरण नहीं है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का साधन भी बन सकता है। किसान या ग्रामीण युवा मशीन खरीदकर आसपास के किसानों को किराये पर कृषि यंत्र सेवा उपलब्ध करा सकते हैं।

स्थानीय स्तर पर ऐसी सेवा करीब 200 रुपये प्रति बीघा के आधार पर उपलब्ध कराने का उदाहरण दिया गया है। हालांकि वास्तविक किराया खेत के आकार, फसल, मिट्टी की स्थिति, कार्य की प्रकृति और स्थानीय बाजार के अनुसार अलग हो सकता है। कस्टम हायरिंग सेंटर अथवा कृषि यंत्र सेवा केंद्रों के माध्यम से छोटे किसानों तक आधुनिक कृषि यंत्र पहुंचाने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।


छोटी जोत और संकरी कतारों में अधिक उपयोगी

ट्रैक्टर की तुलना में पावर वीडर आकार में छोटा और अपेक्षाकृत आसानी से संचालित होने वाला यंत्र है। विशेषकर सब्जियों, बागवानी फसलों और संकरी कतारों वाली खेती में, जहां बड़े कृषि यंत्रों का संचालन मुश्किल होता है, वहां इसका उपयोग सुविधाजनक हो सकता है।

हालांकि हर खेत और हर फसल के लिए पावर वीडर समान रूप से उपयुक्त नहीं होगा। मशीन का चयन फसल की कतार दूरी, मिट्टी की स्थिति, खेत के आकार और प्रस्तावित कार्य के आधार पर किया जाना चाहिए।

सामूहिक उपयोग से छोटे किसानों को मिल सकता है लाभ

डा. देवेश कुमार के अनुसार कृषि में श्रमिकों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में पावर वीडर जैसे छोटे और बहुउपयोगी कृषि यंत्र आधुनिक खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। मशीन की सामूहिक खरीद, किराये पर उपलब्धता और कस्टम हायरिंग की व्यवस्था से छोटे एवं सीमांत किसानों तक कृषि यंत्रीकरण पहुंचाया जा सकता है।

कुल मिलाकर पावर वीडर खेती में कम श्रम, समय की बचत और समय पर कृषि कार्य पूरा करने की दिशा में उपयोगी तकनीकी विकल्प है। जरूरत इस बात की है कि किसान अपनी वास्तविक कृषि जरूरत के अनुसार मशीन का चयन करें और उपलब्ध कृषि यंत्रीकरण योजनाओं व अनुदान की जानकारी लेकर ही निवेश करें।

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