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स्कूलों में POCSO जागरूकता की जिम्मेदारी अब शिक्षकों के कंधों पर, न्यायिक अधिकारियों ने दिए कानूनी प्रशिक्षण


(Reported by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh)

संतकबीरनगर । बच्चों को लैंगिक अपराधों से बचाने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि स्कूल स्तर पर शिक्षकों को भी उसके प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी होना जरूरी है। इसी उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, संतकबीरनगर की ओर से बुधवार को सरकारी एवं गैर सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के वरिष्ठ शिक्षकों के लिए POCSO एक्ट पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आयोजित कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह के नेतृत्व में जनपद न्यायालय के सभागार में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश (POCSO एक्ट) कृष्ण कुमार-V ने की, जबकि संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनन्या साह ने किया।

कानून की जानकारी से आगे, बच्चों तक पहुंचाना भी चुनौती

प्रशिक्षण में शिक्षकों को POCSO एक्ट के प्रमुख कानूनी प्रावधानों और बच्चों को उपलब्ध संरक्षण की जानकारी दी गई। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि शिक्षक स्वयं कानून को समझने के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी उनके अधिकारों और लैंगिक अपराधों के विरुद्ध आवाज उठाने के प्रति जागरूक कर सकें।

हालांकि, ऐसे अभियानों की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षण के बाद स्कूलों में इसका कितना प्रभावी क्रियान्वयन होता है। केवल कार्यशाला आयोजित कर लेने से जागरूकता पूरी नहीं मानी जा सकती। बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना, शिकायतों को गंभीरता से लेना और समय पर संबंधित तंत्र तक सूचना पहुंचाना भी विद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

1098 और 15100 की जानकारी, स्कूलों में हेल्पलाइन प्रदर्शित करने के निर्देश

कार्यक्रम में शिक्षकों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और नालसा हेल्पलाइन 15100 के संबंध में जानकारी दी गई। इन हेल्पलाइन नंबरों को विद्यालयों में ऐसे स्थानों पर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए, जहां बच्चे उन्हें आसानी से देख सकें।

इसके साथ ही विद्यालयों में POCSO अवेयरनेस कमेटी गठित करने के लिए भी निर्देशित किया गया। इसका उद्देश्य स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और लैंगिक अपराधों से संबंधित जागरूकता को संस्थागत रूप देना है।

चित्रकला प्रतियोगिता से बच्चों तक पहुंचाने की कोशिश

इसी क्रम में जनपद न्यायालय के सभागार में प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए “बचपन बचायें, कानून को जाने, अपना और राष्ट्र का भविष्य निर्माण करें” विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।

प्रतियोगिता में शामिल विद्यार्थियों के बीच कानून और बाल सुरक्षा को रचनात्मक माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया। प्रतियोगिता के विजेताओं को 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के अवसर पर जनपद न्यायालय में आयोजित समारोह में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो कार्यक्रम ने बाल सुरक्षा को लेकर स्कूलों की भूमिका को रेखांकित किया है। अब असली परीक्षा प्रशिक्षण के बाद शुरू होगी—क्या प्रत्येक विद्यालय में POCSO जागरूकता समिति सक्रिय होगी, क्या हेल्पलाइन नंबर बच्चों की नजर में होंगे और क्या किसी शिकायत पर बिना दबाव के तत्काल कार्रवाई होगी? इन सवालों के जवाब ही ऐसे अभियानों की वास्तविक प्रभावशीलता तय करेंगे।

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