Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
संत कबीर नगर, । बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा और उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जिले के विभिन्न विद्यालयों में POCSO एक्ट से संबंधित जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। न्यायिक अधिकारियों और विधिक सेवा से जुड़े प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों को कानून के प्रावधानों के साथ-साथ किसी भी असहज या अनुचित व्यवहार की स्थिति में आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आयोजित इन कार्यक्रमों का नेतृत्व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला जज रणधीर सिंह के मार्गदर्शन में किया गया। खलीलाबाद स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में अपर जिला जज प्रथम गजेन्द्र ने छात्राओं को POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) Act की प्रमुख जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनन्या साह ने विद्यार्थियों को समझाया कि यदि किसी छात्र-छात्रा के साथ अथवा उसके किसी मित्र के साथ ऐसा शारीरिक व्यवहार होता है, जिससे वह असहज या असुरक्षित महसूस करे, तो उसे डर या झिझक के कारण चुप नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में माता-पिता, शिक्षक या किसी अन्य भरोसेमंद व्यक्ति को घटना की जानकारी देना जरूरी है।
कानून की जानकारी के साथ शिकायत तंत्र पर भी जोर
जागरूकता कार्यक्रम में बच्चों को यह भी बताया गया कि किसी घटना को छिपाने के बजाय समय रहते उसकी जानकारी संबंधित व्यक्ति या सक्षम तंत्र तक पहुंचाना आवश्यक है। इसके लिए NALSA हेल्पलाइन 15100 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी विद्यार्थियों को दी गई।
मेंहदावल स्थित डीएवी इंटर कॉलेज में सिविल जज जूनियर डिवीजन अशोक कुमार कसौधन तथा प्रधान मजिस्ट्रेट, किशोर न्याय बोर्ड नरेन्द्र कुमार यादव ने विद्यार्थियों को POCSO कानून के प्रावधानों और इसके अंतर्गत आने वाले अपराधों की जानकारी दी। अधिकारियों ने बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया कि कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान करता है और अपराध सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
जागरूकता अभियान की वास्तविक चुनौती—क्या बच्चे शिकायत करने के लिए तैयार हैं?
ऐसे जागरूकता कार्यक्रम निश्चित रूप से बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देने का माध्यम हैं, लेकिन इनका प्रभाव केवल शिविर आयोजित करने तक सीमित न रहे, यह भी महत्वपूर्ण है। बच्चों को कानून की धाराएं बताने के साथ यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि शिकायत करने पर उनकी पहचान, सुरक्षा और भविष्य को लेकर संवेदनशीलता बरती जाएगी।
विशेषकर स्कूल स्तर पर यह सुनिश्चित करना चुनौती है कि बच्चे किसी अनुचित व्यवहार की स्थिति में किससे संपर्क करें, शिकायत कैसे दर्ज कराएं और शिकायत के बाद उन्हें किस प्रकार की सहायता मिलेगी, इसकी व्यावहारिक जानकारी भी उन्हें हो।
कार्यक्रम में चीफ एलएडीसीएस अंजय श्रीवास्तव, प्रज्ञा श्रीवास्तव, मीडिएटर नासरीन खान, भानुप्रकाश यादव सहित पराविधिक स्वयंसेवकों ने भी विभिन्न विद्यालयों में POCSO एक्ट एवं विधिक अधिकारों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम किए।
सवाल यह भी—जागरूकता के बाद निगरानी कितनी?
POCSO जैसे कानूनों की जानकारी बच्चों तक पहुंचाना जरूरी है, लेकिन इसके साथ स्कूलों में सुरक्षित वातावरण, शिकायत व्यवस्था और समयबद्ध कार्रवाई की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में इन शिविरों के बाद विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति और शिकायत तंत्र की पहुंच की समीक्षा भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
बच्चों को उनके अधिकार बताने के साथ उन्हें यह विश्वास दिलाना कि गलत व्यवहार पर चुप रहना मजबूरी नहीं है और मदद मांगना उनका अधिकार है, POCSO जागरूकता अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा सकती है।



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