Review Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
संतकबीरनगर। वर्ष 2018 में दर्ज छेड़खानी और धमकी के एक मामले में करीब आठ साल बाद न्यायालय का फैसला आया है। “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत संतकबीरनगर पुलिस की ओर से प्रभावी पैरवी किए जाने के बाद एएसजे/एसपीजे/पाक्सो एक्ट न्यायालय ने अभियुक्त इसरार उर्फ लाला को दोषसिद्ध करते हुए सश्रम कारावास और कुल 2,500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
मामला 25 मार्च 2018 को कोतवाली खलीलाबाद में दर्ज हुआ था। वादिनी ने अपनी पुत्री के साथ छेड़खानी और धमकी देने का आरोप लगाते हुए इसरार उर्फ लाला पुत्र जुम्मन, निवासी नेदुला के खिलाफ शिकायत दी थी। पुलिस के अनुसार, विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलित कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।
न्यायालय ने मामले में अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 506 तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(w)(i) के तहत दोषसिद्ध किया। धारा 354 में एक वर्ष के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये अर्थदंड, धारा 506 में सात माह के सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड तथा एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धारा में सात माह के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड नहीं जमा करने की स्थिति में प्रत्येक अर्थदंड के लिए अतिरिक्त साधारण कारावास का प्रावधान भी आदेश में किया गया है।
पुलिस ने इसे “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत प्रभावी पैरवी का परिणाम बताया है। इस अभियान का उद्देश्य गंभीर और महत्वपूर्ण मामलों में गुणवत्तापूर्ण विवेचना तथा अभियोजन के माध्यम से दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाना है।
लेकिन इस मामले का एक दूसरा पहलू भी ध्यान खींचता है। घटना और मुकदमा वर्ष 2018 का है, जबकि सजा का फैसला 7 अक्टूबर 2026 को आया। यानी न्यायिक प्रक्रिया को अंतिम परिणाम तक पहुंचने में लगभग आठ वर्ष लग गए। ऐसे मामलों में दोषसिद्धि निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन पीड़ित पक्ष के लिए न्याय की गति भी उतनी ही अहम सवाल है।
अब सवाल यह है कि क्या “ऑपरेशन कन्विक्शन” सिर्फ दोषसिद्धि का आंकड़ा बढ़ाने तक सीमित रहेगा या लंबित मामलों की त्वरित और प्रभावी पैरवी के जरिए न्याय मिलने की समय-सीमा भी कम होगी? क्योंकि किसी मामले में सजा मिलना न्याय की सफलता है, लेकिन समय पर न्याय मिलना उसकी प्रभावशीलता की असली कसौटी है।

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