संतकबीरनगर। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर उत्तर प्रदेश शासन के मिशन शक्ति फेज 6.0 अभियान के तहत जनपद पुलिस ने विभिन्न थाना क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम चलाया। अभियान के दौरान एंटी रोमियो टीमों ने बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, मंदिरों, तिराहों और गांवों में पहुंचकर महिलाओं, बालिकाओं तथा स्कूली छात्राओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और आपातकालीन हेल्पलाइन की जानकारी दी। ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल लगाकर लोगों से संवाद भी किया गया।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में संचालित इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा संबंधी सेवाओं के प्रति जागरूक करना, महिला अपराधों की रोकथाम के लिए जानकारी देना और जरूरत पड़ने पर पुलिस तथा संबंधित सहायता सेवाओं तक पहुंच आसान बनाना रहा। अभियान के दौरान महिला बीट अधिकारियों और मिशन शक्ति टीमों ने महिलाओं को अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखने तथा अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।
आठ थाना क्षेत्रों में चला जागरूकता अभियान
पुलिस के अनुसार, कोतवाली खलीलाबाद की टीम ने आजमपुर, बघौली तिराहा और कुसमीदाड़ी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। महिला थाना पुलिस ने समय माता मंदिर, मेंहदावल बाईपास और जिला अस्पताल क्षेत्र में लोगों को जागरूक किया। धनघटा पुलिस ने चपरा पूर्वी और उचवा गांव में अभियान चलाया, जबकि महुली पुलिस ने सवापार और मझौसा उर्फ गणेशपुर में महिलाओं एवं बालिकाओं से संवाद किया।
मेंहदावल पुलिस ने बाराखाल दुर्गा मंदिर और अंजहिया बाजार में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। बखिरा पुलिस ने सहजनवा तिराहे पर, बेलहरकला पुलिस ने नगर पंचायत क्षेत्र में तथा धर्मसिंहवा पुलिस ने माउवाकोमर, जखनिया, बेलराई और हकीमपुर में महिलाओं, बालिकाओं और छात्राओं को जागरूक किया। इस दौरान पंपलेट वितरित कर सुरक्षा संबंधी जरूरी जानकारियां दी गईं।
हेल्पलाइन नंबरों की दी गई जानकारी
अभियान के दौरान महिलाओं और आमजन को विभिन्न सहायता सेवाओं के नंबरों की जानकारी दी गई। पुलिस ने महिला हेल्पलाइन 1090, आपातकालीन सेवा 112, चिकित्सा सहायता 108, बाल सहायता हेल्पलाइन 1098 और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के बारे में बताया। साइबर अपराध से संबंधित शिकायत के लिए cybercrime.gov.in पोर्टल की जानकारी भी दी गई।
पुलिस टीमों ने महिलाओं को आत्मरक्षा के उपायों, महिला अधिकारों और सरकारी योजनाओं के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की परेशानी या उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहने के बजाय उपलब्ध सहायता सेवाओं का उपयोग करें।
जागरूकता के साथ जवाबदेही भी जरूरी
मिशन शक्ति जैसे अभियानों की उपयोगिता केवल कार्यक्रम आयोजित करने या पंपलेट बांटने तक सीमित नहीं है। महिला सुरक्षा के प्रति वास्तविक भरोसा तब मजबूत होगा, जब शिकायत मिलने पर समयबद्ध कार्रवाई हो, पीड़ित महिलाओं को सहायता मिले और उन्हें अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार भटकना न पड़े।
गांवों में चौपाल के माध्यम से संवाद की पहल महिलाओं की समस्याओं को समझने का अवसर देती है। हालांकि, अभियान की प्रभावशीलता का आकलन इस आधार पर भी किया जाना चाहिए कि कितनी महिलाओं तक सही जानकारी पहुंची, कितनी शिकायतें सामने आईं और जरूरतमंदों को कितनी प्रभावी सहायता मिल सकी। नियमित जागरूकता के साथ शिकायतों के निस्तारण और सुरक्षा सेवाओं की उपलब्धता पर ध्यान देना भी आवश्यक है।
जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में चलाए गए इस अभियान के जरिए पुलिस ने महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा संबंधी जानकारी देने तथा ग्रामीणों से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। अब इसकी सार्थकता इस बात से भी तय होगी कि जागरूकता के साथ महिलाओं को सुरक्षित माहौल और शिकायतों के समाधान का भरोसा कितना मजबूत होता है।
Post a Comment