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संतकबीरनगर: ग्राम प्रहरियों को साइबर ठगी से बचाव की ट्रेनिंग, फर्जी पुलिस कॉल और APK फाइलों से सतर्क रहने की सलाह


  • पुलिस लाइन में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में OTP, पासवर्ड और बैंक विवरण साझा न करने की दी गई हिदायत; ठगी होने पर 1930 पर शिकायत करने की जानकारी

Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh 

संतकबीरनगर। गांवों में पुलिस और आम जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले ग्राम प्रहरियों को अब साइबर अपराधों से बचाव और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में संतकबीरनगर पुलिस लाइन के सभागार में जनपद के सभी ग्राम प्रहरियों के लिए साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों, संदिग्ध कॉल और लिंक की पहचान तथा साइबर अपराध होने पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया समझाई गई।

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह और क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय की उपस्थिति रही। साइबर क्राइम थाना टीम ने ग्राम प्रहरियों को बताया कि साइबर अपराधी लोगों को लालच देने, डराने या सरकारी अधिकारी बनकर विश्वास हासिल करने जैसे तरीकों से ठगी का शिकार बना सकते हैं।

फर्जी कॉल से लेकर APK फाइल तक, ठगी के तरीकों की जानकारी

कार्यक्रम में अज्ञात कॉल, संदिग्ध लिंक, फर्जी ई-मेल, लॉटरी और आकर्षक ऑफर, QR कोड स्कैन, फर्जी क्रेडिट, वर्क फ्रॉम होम के नाम पर धोखाधड़ी तथा पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर पैसे मांगने जैसे मामलों के प्रति सतर्क किया गया। ग्राम प्रहरियों को सलाह दी गई कि किसी भी अनजान लिंक पर बिना सत्यापन क्लिक न करें और अज्ञात स्रोत से प्राप्त APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल करने से बचें।

पुलिस टीम ने बैंक खाते की जानकारी, OTP, पासवर्ड और अन्य गोपनीय विवरण किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करने पर विशेष जोर दिया। यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बनकर फोन पर डराए, धमकाए अथवा किसी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर पैसे मांगे, तो उसकी पहचान और दावे का सत्यापन करना जरूरी बताया गया।

साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत

ग्राम प्रहरियों को बताया गया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। इसके अलावा भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जल्द शिकायत करने से संबंधित लेनदेन पर आवश्यक कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।

कार्यक्रम में प्रतिसार निरीक्षक रामबली यादव, साइबर क्राइम थाना के उपनिरीक्षक जय प्रकाश यादव, कांस्टेबल राम प्रवेश मद्देशिया सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

जागरूकता के साथ त्वरित कार्रवाई भी जरूरी

डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर ठगी के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार लोग तकनीकी जानकारी के अभाव में फर्जी संदेशों, लिंक और फोन कॉल पर भरोसा कर लेते हैं। ऐसे में ग्राम प्रहरियों को प्रशिक्षित करना उपयोगी पहल है, क्योंकि वे गांवों में लोगों तक सुरक्षा संबंधी जानकारी पहुंचा सकते हैं।

हालांकि, जागरूकता कार्यक्रमों का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब इसकी जानकारी गांव-गांव तक पहुंचे और पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने में मदद मिले। ग्राम प्रहरियों की भूमिका केवल सूचना देने तक सीमित न रहकर लोगों को सही हेल्पलाइन और आधिकारिक पोर्टल तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

साइबर सुरक्षा का सबसे जरूरी नियम: किसी अनजान व्यक्ति को OTP, पासवर्ड या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी न दें। संदेह होने पर पहले सत्यापन करें और ठगी होने पर बिना देर किए शिकायत दर्ज कराएं।

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