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Santkabir Nagar News: पौली में विकास की चमक के पीछे क्या छिपा था? नोडल अधिकारी के निरीक्षण में खुली कई व्यवस्थाओं की पोल


(Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh)

संत कबीर नगर, । आकांक्षी विकासखंड पौली में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों की वास्तविक स्थिति परखने के लिए विशेष सचिव आबकारी विभाग एवं नोडल अधिकारी अभिषेक आनन्द (आईएएस) ने सोमवार को विभिन्न संस्थानों और विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण में जहां शिक्षा, डिजिटल सुविधाओं, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास से जुड़ी व्यवस्थाओं को परखा गया, वहीं कई स्थानों पर सुधार की जरूरत भी सामने आई।

नोडल अधिकारी ने पीएम श्री कम्पोजिट विद्यालय चकिया में आईसीटी लैब, लर्निंग बाई डूइंग लैब, कंप्यूटर लैब और आंगनबाड़ी लर्निंग लैब का निरीक्षण किया। डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था भी देखी गई। डिजिटल संसाधनों को बच्चों और ग्रामीणों के लिए उपयोगी बनाने के लिए उन्होंने डिजिटल लाइब्रेरी तथा कंप्यूटर लैब के संचालन का रोस्टर तैयार करने का निर्देश दिया। इसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया कि किस समय कौन व्यक्ति या विद्यार्थी प्रशिक्षण ले रहा है और उसके आने-जाने का समय क्या है।


यह निर्देश अपने आप में इस सवाल को रेखांकित करता है कि डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने के बाद उनका नियमित और प्रभावी उपयोग कितना हो रहा है। केवल कंप्यूटर, स्मार्ट संसाधन या डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कर देना शिक्षा की गुणवत्ता की गारंटी नहीं है। वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि कितने बच्चे नियमित रूप से इन सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं और उनकी सीखने की क्षमता में कितना बदलाव आया है।

आंगनबाड़ी लर्निंग लैब के निरीक्षण के दौरान पोषाहार वितरण की निगरानी पर जोर दिया गया। नोडल अधिकारी ने पोषण ट्रैकर ऐप के साथ रजिस्टर में भी वितरण का विवरण दर्ज करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण के बीच पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। हालांकि, कुपोषण के खिलाफ अभियान की असली कसौटी सिर्फ पोषाहार वितरण का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर में दिखाई देने वाला सुधार होगा।

पंचायत भवन के निरीक्षण में ग्रामीणों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं के प्रचार-प्रसार की कमी पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल खड़ा हुआ। नोडल अधिकारी ने पंचायत भवन से मिलने वाली सभी सुविधाओं का डिस्प्ले कराने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीणों को जानकारी हो सके कि उन्हें कौन-कौन सी सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हैं।

पंचायत भवन की बाउंड्रीवाल से संबंधित जमीनी विवाद का मामला भी सामने आया, जिसके निस्तारण के लिए राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए गए। वहीं अधूरे आवासों को नियमानुसार किश्त जारी कर पूरा कराने तथा आंगनबाड़ी के बंद शौचालयों को दोबारा क्रियाशील कराने के निर्देश दिए गए।


स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नोडल अधिकारी ने संस्थागत प्रसव बढ़ाने पर जोर दिया। आशा और एएनएम के माध्यम से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण तथा बच्चों के शत-प्रतिशत टीकाकरण को सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। यहां भी चुनौती स्पष्ट है—सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता से आगे बढ़कर उनका वास्तविक उपयोग और परिणाम सुनिश्चित करना।

कृषि क्षेत्र में स्थानीय किसानों को जोड़कर अधिक से अधिक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने के निर्देश दिए गए। वहीं आरआरसी सेंटर में कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संचालन कराने को कहा गया। इससे संकेत मिलता है कि ग्रामीण स्वच्छता व्यवस्था में केवल सेंटर बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि नियमित कूड़ा संग्रह और उसके संचालन की स्थायी व्यवस्था भी जरूरी है।

निरीक्षण के बाद ग्राम पंचायत चकिया में जन चौपाल, संवाद एवं समीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां ग्रामीणों से विभिन्न विभागों की योजनाओं के बारे में फीडबैक लिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि विकासखंड स्तर पर लगातार समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजना के लाभ से वंचित न रहे।


पौली के निरीक्षण में सामने आए निर्देशों को केवल प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। रोस्टर बनना, बंद शौचालय खुलना, अधूरे आवास पूरे होना, कूड़ा संग्रह शुरू होना, संस्थागत प्रसव बढ़ना और पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचना—यही वे परिणाम हैं जिनसे आकांक्षी विकासखंड की वास्तविक प्रगति मापी जाएगी।

अब सवाल यह है कि निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देश कितनी जल्दी धरातल पर उतरते हैं और अगली समीक्षा तक इन व्यवस्थाओं में कितना ठोस बदलाव दिखाई देता है। आकांक्षी विकासखंड की सफलता सरकारी रिपोर्टों से नहीं, बल्कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाले बदलाव से तय होगी।

निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी धनघटा वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता, खंड विकास अधिकारी पौली अखिलेश कुमार, आबकारी निरीक्षक खलीलाबाद विजय आनन्द, सीएम फेलो सहित संबंधित अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे।

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