Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
संत कबीर नगर,। नीति आयोग के आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम के तहत बघौली में विकास की रफ्तार और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति परखने के लिए विशेष सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा नोडल अधिकारी रवि रंजन ने सोमवार को क्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान नीति आयोग द्वारा निर्धारित 50 प्रमुख पैरामीटर्स के आधार पर विभिन्न विभागों की योजनाओं और कार्यों की समीक्षा की गई।
सूचना अधिकारी के अनुसार नोडल अधिकारी का यह दौरा महज कागजी प्रगति की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बघौली, उच्च प्राथमिक विद्यालय कुरियापाल बेलहसा, आंगनबाड़ी केन्द्र और पंचायत भवन का स्थलीय निरीक्षण कर यह समझने का प्रयास किया गया कि सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का वास्तविक लाभ आम लोगों तक किस स्तर तक पहुंच रहा है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बघौली के निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई, मरीजों की सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के नियमित टीकाकरण पर विशेष जोर देते हुए चिकित्साधिकारी को व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्वास्थ्य केन्द्र के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत रखने पर भी जोर दिया गया।
हालांकि, निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों के साथ सबसे अहम सवाल यही है कि स्वास्थ्य केन्द्र पर उपलब्ध व्यवस्थाओं का लाभ ग्रामीणों को नियमित और पर्याप्त रूप से मिल रहा है या नहीं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण को लेकर निर्देश जारी होना यह भी संकेत देता है कि स्वास्थ्य सेवाओं में केवल लक्ष्य निर्धारित करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी निरंतर निगरानी और जमीनी उपलब्धता भी जरूरी है।
शिक्षा व्यवस्था की स्थिति परखने के लिए उच्च प्राथमिक विद्यालय कुरियापाल बेलहसा का भी निरीक्षण किया गया। यहां स्मार्ट टीवी के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था का जायजा लिया गया। डिजिटल संसाधनों से शिक्षा को आधुनिक बनाने की कोशिश निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि इन संसाधनों का नियमित उपयोग कितना हो रहा है और विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता पर उसका क्या असर पड़ रहा है।
आंगनबाड़ी केन्द्र के निरीक्षण के दौरान सैम और मैम श्रेणी के बच्चों की स्थिति की जानकारी ली गई। कुपोषण से जुड़े मामलों में केवल बच्चों की पहचान करना ही पर्याप्त नहीं है। उनके पोषण, स्वास्थ्य निगरानी और नियमित फॉलोअप की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह भी आकांक्षी विकासखंड की प्रगति का महत्वपूर्ण पैमाना है।
पंचायत भवन के निरीक्षण में वहां से उपलब्ध कराई जाने वाली विभिन्न सेवाओं की जानकारी ली गई। नोडल अधिकारी ने पंचायत भवन का नियमित संचालन सुनिश्चित करने और उपलब्ध सेवाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य यही है कि ग्रामीणों को सरकारी सेवाओं के लिए अनावश्यक रूप से दूसरे कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकार की योजनाओं का जिम्मेदारीपूर्वक संचालन करने तथा प्रत्येक योजना के शत-प्रतिशत पात्र लाभार्थियों तक उसका लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए गए। यही बिंदु आकांक्षी विकासखंड की वास्तविक सफलता का सबसे बड़ा पैमाना भी माना जा सकता है। आंकड़ों में सुधार और कागजी उपलब्धियों के साथ यदि अंतिम व्यक्ति तक सुविधा नहीं पहुंचती, तो विकास के दावों की जमीनी तस्वीर अधूरी ही मानी जाएगी।
बघौली को आकांक्षी विकासखंड के रूप में निर्धारित 50 पैरामीटर्स पर आगे बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, पंचायत सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जरूरत है। अब देखना यह होगा कि नोडल अधिकारी के निरीक्षण में दिए गए निर्देशों का अनुपालन आने वाले दिनों में किस स्तर तक दिखाई देता है और क्या इसका सीधा असर ग्रामीणों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं पर पड़ता है।
निरीक्षण के दौरान खंड विकास अधिकारी बघौली अर्जित प्रकाश, एडीओ पंचायत, मुख्यमंत्री शोधार्थी, खंड शिक्षा अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी और ग्रामवासी मौजूद रहे।



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