संतकबीरनगर । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर संतकबीरनगर कलेक्ट्रेट परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिलाधिकारी अनुज मलिक की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, माल्यार्पण, विचार गोष्ठी और पौधरोपण के जरिए दोनों महापुरुषों को श्रद्धांजलि दी गई।
जिलाधिकारी ने सुबह आठ बजे कलेक्ट्रेट परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद अधिकारियों, कर्मचारियों, पुलिसकर्मियों और छात्र-छात्राओं के साथ राष्ट्रगान हुआ तथा देश की एकता, अखंडता और अहिंसा की शपथ दिलाई गई। जिलाधिकारी अनुज मलिक, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व सत्य प्रकाश और अपर जिलाधिकारी न्यायिक चन्द्रेश कुमार सिंह सहित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने गांधी और शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम में आयोजित विचार गोष्ठी में जिलाधिकारी ने कहा कि गांधी और शास्त्री के सिद्धांतों को केवल स्मरण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों के व्यावहारिक पक्ष को अपनी कार्यशैली में शामिल करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने गांधी के सत्य, अहिंसा, देशभक्ति और नेतृत्व तथा शास्त्री के आत्मबल, सादगी और साहस का उल्लेख करते हुए अधिकारियों-कर्मचारियों से उनके जीवन से सीख लेने का आह्वान किया।
गौर करने वाली बात यह रही कि जिलाधिकारी ने महापुरुषों के आदर्शों की चर्चा को प्रशासन और शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया। छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षा को संघर्ष और जीवन में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण आधार बताया। साथ ही ऐसी शिक्षा पर जोर दिया, जो ज्ञान के साथ चरित्र निर्माण भी करे।
जिलाधिकारी ने कहा कि व्यक्ति का जन्म किस परिवार में होगा, यह उसके नियंत्रण में नहीं होता, लेकिन मेहनत, संघर्ष और शिक्षा के माध्यम से वह जीवन में कहां तक पहुंचेगा, इसमें उसकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कठिन परिस्थितियों में मनोबल बनाए रखने और बेहतर शिक्षा हासिल करने की अपील की।
अपर जिलाधिकारी सत्य प्रकाश ने कहा कि गांधी और शास्त्री की सोच को वर्तमान परिस्थितियों में जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उत्थान करना जरूरी है। वहीं अपर जिलाधिकारी न्यायिक चन्द्रेश कुमार सिंह ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि कार्यालयों में आने वाले आम नागरिकों की समस्याओं का संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ निस्तारण किया जाना चाहिए।
यही बिंदु इस आयोजन को महज एक औपचारिक जयंती कार्यक्रम से आगे देखने का अवसर भी देता है। गांधी और शास्त्री के नाम पर आयोजित कार्यक्रमों में सत्य, सादगी, ईमानदारी, पारदर्शिता और अंतिम व्यक्ति तक पहुंच जैसे आदर्शों की चर्चा हर वर्ष होती है, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक कसौटी यह है कि आम नागरिक को सरकारी कार्यालय में इन मूल्यों का अनुभव कितना होता है।
कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों की छात्राओं ने राष्ट्रगान और देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। वरिष्ठ समाजसेवी एवं पत्रकार शिव कुमार गुप्ता सहित अन्य वक्ताओं ने गांधी और शास्त्री के जीवन, सिद्धांतों तथा वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी अनुज मलिक, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व सत्य प्रकाश और अपर जिलाधिकारी न्यायिक चन्द्रेश कुमार सिंह ने कलेक्ट्रेट परिसर में पौधरोपण किया। आमजन को अधिक से अधिक पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी एवं पत्रकार शिवकुमार गुप्ता, अपर उप जिलाधिकारी सुधीर कुमार, वरिष्ठ कोषाधिकारी त्रिभुवन लाल, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी चन्द्रशेखर यादव, जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश कुमार, प्रशासनिक अधिकारी बद्री प्रसाद श्रीवास्तव, ओएसडी राकेश कुमार, ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर राकेश कुमार सिंह, सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज सहित कलेक्ट्रेट के अधिकारी-कर्मचारी और विद्यालयों के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
गांधी और शास्त्री जयंती पर कलेक्ट्रेट में संदेश स्पष्ट रहा—महापुरुषों के आदर्शों को केवल भाषण और समारोह तक सीमित रखने के बजाय उन्हें प्रशासनिक व्यवहार में उतारना जरूरी है। अब इस संदेश की वास्तविक परीक्षा कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी कार्यालयों में आने वाले आम नागरिकों के अनुभव, शिकायतों के निस्तारण, पारदर्शिता और योजनाओं के लाभ की अंतिम व्यक्ति तक पहुंच से होगी।






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