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“सोचें, जांचें और फिर क्लिक करें”: महुली पुलिस ने साइबर ठगी के नए तरीकों से किया सावधान



Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh 

संतकबीरनगर। डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। कभी फर्जी कस्टमर केयर के नाम पर तो कभी किसी सरकारी विभाग या बैंक का अधिकारी बनकर लोगों को जाल में फंसाने की कोशिश की जाती है। इसी चुनौती को देखते हुए महुली पुलिस ने 3 अक्टूबर 2026 को विशेष साइबर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित ब्राउज़िंग, संदिग्ध लिंक, फर्जी कस्टमर केयर और .APK फाइलों से जुड़े जोखिमों के प्रति सचेत किया।

पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन में चल रहे अक्टूबर माह के साइबर जागरूकता अभियान के तहत पुलिस ने आमजन को समझाने का प्रयास किया कि इंटरनेट पर दिखाई देने वाली हर जानकारी या लिंक भरोसेमंद नहीं होता। किसी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसके स्रोत और वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचना जरूरी है।

अभियान के दौरान Secure Browsing, Safe Browsing, Antivirus और Device Update जैसे साइबर सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई। लोगों को सलाह दी गई कि वेबसाइट खोलते समय URL और HTTPS जैसे सुरक्षा संकेतों पर ध्यान दें तथा अनजान ई-मेल, SMS, WhatsApp संदेश या संदिग्ध लिंक को बिना सत्यापन के न खोलें।

फर्जी कस्टमर केयर बना साइबर ठगी का नया रास्ता

साइबर ठगी के मामलों में फर्जी कस्टमर केयर नंबर भी एक गंभीर जोखिम बन सकते हैं। किसी बैंक, कंपनी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या सेवा का नंबर इंटरनेट पर देखकर उस पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसके आधिकारिक स्रोत से सत्यापन करना जरूरी है।

पुलिस ने विशेष रूप से स्क्रीन शेयरिंग और Remote Access App के खतरे के बारे में भी लोगों को बताया। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐसी ऐप डाउनलोड करने से मोबाइल और उसमें मौजूद संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुंच का जोखिम बढ़ सकता है।

.APK फाइल: एक क्लिक भारी पड़ सकता है

जागरूकता अभियान का एक प्रमुख मुद्दा .APK फाइलों के जरिए होने वाली संभावित ठगी रहा। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी बैंक, बिजली विभाग, पुलिस, कूरियर कंपनी अथवा अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं के नाम का इस्तेमाल करते हुए लोगों को फर्जी संदेश भेज सकते हैं और मोबाइल में .APK फाइल इंस्टॉल कराने का प्रयास कर सकते हैं।

ऐसी स्थिति में किसी अनजान स्रोत से प्राप्त .APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल करना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर बैंकिंग और UPI से जुड़े मोबाइल में ऐसी लापरवाही आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।


अपडेटेड मोबाइल भी साइबर सुरक्षा की पहली जरूरत

पुलिस ने मोबाइल और कंप्यूटर में विश्वसनीय सुरक्षा सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने तथा उसे समय-समय पर अपडेट रखने की सलाह दी। मोबाइल, ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउजर और महत्वपूर्ण ऐप्स में Auto Update तथा Security Update की सुविधा सक्रिय रखना भी उपयोगी बताया गया।

अभियान में MKavach-2 मोबाइल सुरक्षा एप के संबंध में भी लोगों को जानकारी दी गई। हालांकि केवल किसी सुरक्षा एप या तकनीकी सुविधा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। डिजिटल सुरक्षा में उपयोगकर्ता की सावधानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

ठगी हो जाए तो इंतजार नहीं, तत्काल शिकायत जरूरी

साइबर अपराध का शिकार होने की स्थिति में पुलिस ने घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करने की अपील की। आमजन को 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने और संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को तत्काल सूचना देने की सलाह दी गई।

साइबर ठगी में समय महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए घटना के बाद देरी करने के बजाय जितनी जल्दी संभव हो शिकायत और बैंकिंग स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करना नुकसान को सीमित करने में मदद कर सकता है।

महुली पुलिस का संदेश साफ है—“सोचें, जांचें और फिर क्लिक करें।” डिजिटल दुनिया में सुविधा के साथ सावधानी भी जरूरी है। किसी लिंक पर जल्दबाजी में किया गया एक क्लिक, अनजान व्यक्ति को दी गई बैंकिंग जानकारी या बिना जांचे इंस्टॉल की गई फाइल परेशानी का कारण बन सकती है।

अभियान के दौरान थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार, उपनिरीक्षक अनुज यादव, महिला मुख्य आरक्षी पुष्पा यादव, आरक्षी अंकित पटेल और महिला आरक्षी मुस्कान सिंह ने आमजन को साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी देकर जागरूक किया।

साइबर जागरूकता अभियानों की वास्तविक उपयोगिता केवल लोगों तक संदेश पहुंचाने में नहीं, बल्कि उस संदेश को उनके रोजमर्रा के डिजिटल व्यवहार का हिस्सा बनाने में है। ऐसे में “सोचें, जांचें और फिर क्लिक करें” जैसी छोटी सावधानी वास्तव में डिजिटल सुरक्षा की बड़ी ढाल बन सकती है।

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