Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
संतकबीरनगर। इंटरनेट और स्मार्टफोन ने रोजमर्रा के काम आसान किए हैं, लेकिन इसी सुविधा के साथ साइबर ठगी के नए रास्ते भी सामने आ रहे हैं। कभी फर्जी कस्टमर केयर के नाम पर तो कभी बैंक, बिजली विभाग, पुलिस या कूरियर कंपनी का नाम इस्तेमाल कर लोगों को संदिग्ध लिंक और .APK फाइल भेजी जाती है। ऐसे डिजिटल खतरे को देखते हुए संतकबीरनगर पुलिस अक्टूबर माह में विशेष साइबर जागरूकता अभियान चला रही है।
पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन में 3 अक्टूबर को चलाए गए अभियान में आमजन को “Web Safety Tools” के माध्यम से सुरक्षित इंटरनेट इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी गई। अभियान में Secure Browsing, Safe Browsing, Antivirus और Device Update जैसे उपायों पर जोर दिया गया।
पुलिस ने लोगों को सलाह दी कि इंटरनेट पर किसी वेबसाइट को खोलने से पहले उसके स्रोत और URL की जांच करें। HTTPS और सुरक्षा संकेत दिखाई देने मात्र से किसी वेबसाइट को पूरी तरह सुरक्षित मानने के बजाय वेबसाइट की विश्वसनीयता भी परखी जानी चाहिए। अनजान ई-मेल, SMS, WhatsApp संदेश या संदिग्ध लिंक पर जल्दबाजी में क्लिक करने से बचने की सलाह दी गई।
फर्जी कस्टमर केयर पर भरोसा पड़ सकता है भारी
ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कस्टमर केयर के नाम पर होने वाली ठगी भी लोगों के लिए चुनौती बन सकती है। पुलिस ने बताया कि किसी कंपनी या संस्था का कस्टमर केयर नंबर अथवा ई-मेल इंटरनेट पर देखकर सीधे संपर्क करने के बजाय आधिकारिक स्रोत से उसकी पुष्टि करना जरूरी है।
अभियान के दौरान लोगों को संचार साथी पोर्टल पर उपलब्ध संबंधित जानकारी के जरिए सत्यापन करने की सलाह दी गई। साथ ही किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर Screen Sharing या Remote Access App डाउनलोड न करने की चेतावनी दी गई, क्योंकि ऐसी गतिविधियां निजी और वित्तीय जानकारी की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।
.APK फाइल के नाम पर जाल, एक इंस्टॉलेशन से बढ़ सकता है खतरा
साइबर जागरूकता अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा .APK फाइल को लेकर लोगों को सतर्क करना रहा। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी प्रतिष्ठित संस्थाओं के नाम का इस्तेमाल करके फर्जी संदेश या लिंक भेज सकते हैं और लोगों को मोबाइल में .APK फाइल इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
ऐसे मामलों में अनजान स्रोत से आई फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करना मोबाइल की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है और संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुंच का जोखिम पैदा कर सकता है। खासकर बैंकिंग और UPI से जुड़े मोबाइल में ऐसी लापरवाही आर्थिक नुकसान की वजह बन सकती है।
इसलिए किसी भी अनजान .APK फाइल को केवल इसलिए इंस्टॉल नहीं करना चाहिए क्योंकि संदेश में किसी बैंक, विभाग या प्रतिष्ठित संस्था का नाम लिखा है। संदेह होने पर संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करना अधिक सुरक्षित तरीका है।
अपडेटेड डिवाइस भी जरूरी, लेकिन सिर्फ तकनीक पर निर्भरता पर्याप्त नहीं
पुलिस ने मोबाइल और कंप्यूटर में विश्वसनीय Antivirus या Security Software रखने और उसे नियमित रूप से अपडेट करने की सलाह दी। मोबाइल, कंप्यूटर, ब्राउजर और महत्वपूर्ण ऐप्स में Auto Update सक्रिय रखने तथा Security Updates समय से इंस्टॉल करने पर भी जोर दिया गया।
अभियान के दौरान MKavach-2 मोबाइल सुरक्षा एप के संबंध में भी जानकारी दी गई। हालांकि साइबर सुरक्षा केवल किसी एक ऐप या सुरक्षा सॉफ्टवेयर पर निर्भर नहीं करती। मजबूत पासवर्ड, गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा न करना, संदिग्ध लिंक से दूरी और किसी भी डिजिटल अनुरोध की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
जागरूकता की असली परीक्षा व्यवहार में
साइबर जागरूकता अभियान के दौरान दिया गया संदेश बेहद सरल है—“सोचें → जांचें → फिर क्लिक करें।” लेकिन इसकी वास्तविक उपयोगिता तभी सामने आएगी जब यह सावधानी लोगों की रोजमर्रा की डिजिटल आदत बने।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐप डाउनलोड करने, बिना जांचे लिंक खोलने या कस्टमर केयर के नाम पर निजी जानकारी साझा करने से पहले कुछ सेकंड रुककर सत्यापन करना साइबर ठगी से बचाव में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
अभियान के दौरान साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के निरीक्षक दिलीप सिंह, मुख्य आरक्षी रामप्रवेश मद्धेशिया और महिला मुख्य आरक्षी अमृता सिंह तथा साइबर हेल्पडेस्क धनघटा के उपनिरीक्षक राजेश कुमार दुबे, आरक्षी प्रज्ञांशु, आरक्षी मोहित और आरक्षी अमित कुमार ने लोगों को साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
सवाल अब केवल यह नहीं है कि पुलिस कितने लोगों को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करती है, बल्कि यह भी है कि जागरूकता के बाद कितने लोग “क्लिक करने से पहले जांच” को अपनी डिजिटल आदत बनाते हैं। यही किसी भी साइबर जागरूकता अभियान की वास्तविक कसौटी हो सकती है।



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