Top News

गैंगस्टर के में 14 साल बाद कोर्ट का बड़ा फ़ैसला, पांच साल की जेल, बीस हज़ार जुर्माना, जानिए क्या था पूरा मामला


(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)

संतकबीरनगर। अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ उन्हें न्यायालय से सजा दिलाने की दिशा में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत संतकबीरनगर पुलिस को एक और सफलता मिली है। प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में न्यायालय ने अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए पांच वर्ष के कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न जमा करने पर अभियुक्त को एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।

यह फैसला 31 जुलाई 2026 को अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी द्वितीय, संतकबीरनगर डा. दिव्यानंद द्विवेदी की अदालत ने सुनाया।

2012 के गैंगस्टर एक्ट मामले में आया फैसला

मामला कोतवाली खलीलाबाद में वर्ष 2012 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 159/2012 से संबंधित है। इसमें उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 3(1) के तहत कार्रवाई की गई थी।

न्यायालय ने मामले में अभियुक्त पारस चौरसिया पुत्र राम अचल चौरसिया, निवासी धमरजा बेलराई पूर्वा, थाना कोतवाली खलीलाबाद, को दोषसिद्ध मानते हुए पांच वर्ष के कारावास तथा 20 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।

ऑपरेशन कन्विक्शन’ में सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, सजा तक पहुंचाने पर जोर

पुलिस के अनुसार, पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत गुणवत्तापूर्ण विवेचना और न्यायालय में प्रभावी पैरवी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर मामलों को मजबूत साक्ष्यों और प्रभावी अभियोजन के माध्यम से न्यायालय में तार्किक परिणति तक पहुंचाना है।

इस मामले में पांच वर्ष की सजा पुलिस की पैरवी के लिए उपलब्धि जरूर है, लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आता है—2012 में दर्ज मामले का फैसला 2026 में यानी करीब 14 वर्ष बाद आया। इससे स्पष्ट होता है कि आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी और मुकदमा दर्ज होने के बाद समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना अब भी बड़ी चुनौती है।

लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण पर भी नजर जरूरी

‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत सजा दिलाना पुलिस की अभियोजन क्षमता का महत्वपूर्ण संकेत है, लेकिन अभियान की वास्तविक सफलता का आकलन केवल सजा की संख्या से नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण विवेचना, मजबूत साक्ष्य, प्रभावी अभियोजन और मुकदमों के समयबद्ध निस्तारण से किया जाना चाहिए।

गैंगस्टर एक्ट जैसे मामलों में लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया अपराध नियंत्रण की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है। ऐसे में पुराने लंबित मामलों की नियमित समीक्षा और कमजोर कड़ियों को दूर करना जरूरी होगा, ताकि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का अंतिम परिणाम जल्द और प्रभावी रूप से सामने आए।

सजा का प्रावधान: 5 वर्ष का कारावास और ₹20,000 अर्थदंड। अर्थदंड न देने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास।

Post a Comment

Previous Post Next Post
Mission Sandesh
Mission Sandesh