(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
मेहदावल, संतकबीरनगर। ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में मेहदावल विधानसभा क्षेत्र के लिए पांच प्रमुख संपर्क मार्गों के निर्माण को ₹8.28 करोड़ से अधिक की वित्तीय स्वीकृति मिलने का दावा किया गया है। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (CMGSY) के तहत स्वीकृत इन परियोजनाओं की कुल लंबाई 8.30 किलोमीटर है। संबंधित कार्यों के लिए पहली किस्त के रूप में ₹2.77 करोड़ से अधिक की धनराशि अवमुक्त किए जाने की जानकारी दी गई है।
मेहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी ने इसे ग्रामीण इलाकों के विकास और आवागमन की सुविधा से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया है। विधायक का कहना है कि इन मार्गों के निर्माण से गांवों और मजरों को मुख्य मार्गों से बेहतर संपर्क मिलेगा तथा ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा होगी।
पांच मार्गों पर खर्च होंगे ₹8.28 करोड़
विधायक की ओर से जारी विवरण के अनुसार, मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत जिन पांच मार्गों को स्वीकृति मिली है, उनमें अमरगढ़ से लौहरौली मिश्र मार्ग का 1 किलोमीटर नवनिर्माण शामिल है। इस पर ₹122 लाख की स्वीकृति दी गई है, जबकि पहली किस्त के तौर पर ₹41.68 लाख अवमुक्त किए जाने की जानकारी है।
इसी तरह कुशहरा दासडीह मार्ग से कुशहरा निषाद बस्ती शिव मंदिर तक 1 किलोमीटर संपर्क मार्ग के लिए ₹135.85 लाख स्वीकृत किए गए हैं। इसकी पहली किस्त ₹46.41 लाख बताई गई है।
लोहरसन अस्पताल से खरवनिया गांव होते हुए खरवनिया चौराहे तक 1.50 किलोमीटर सड़क के नवनिर्माण के लिए ₹162.52 लाख की स्वीकृति और ₹55.52 लाख की पहली किस्त का विवरण दिया गया है।
समोगर भौर व्यास मार्ग से कमालीपुरवा होते हुए समदा प्रतापपुर संपर्क मार्ग के 2.20 किलोमीटर हिस्से के लिए ₹170.34 लाख स्वीकृत किए गए हैं। इसके लिए ₹55.55 लाख की पहली किस्त बताई गई है।
वहीं, गगनई राय से बौधरा बाबा तक 2.60 किलोमीटर संपर्क मार्ग के लिए सबसे अधिक ₹237.56 लाख की स्वीकृति दी गई है। इस कार्य के लिए पहली किस्त के रूप में ₹78.15 लाख अवमुक्त किए जाने की जानकारी है।
स्वीकृति से ज्यादा महत्वपूर्ण होगा निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्धता
ग्रामीण सड़क परियोजनाओं के लिए वित्तीय स्वीकृति निश्चित रूप से महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा जब निर्माण कार्य समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और मानकों के अनुरूप पूरा हो। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि इनके जरिए अस्पताल, बाजार, स्कूल और सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होती है।
ऐसे में इन पांच मार्गों के निर्माण की प्रगति पर निगरानी भी अहम होगी। खासकर बरसात के मौसम में ग्रामीण संपर्क मार्गों की स्थिति अक्सर चुनौती बनती है। इसलिए निर्माण में गुणवत्ता के साथ जलनिकासी और सड़क की टिकाऊपन पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
पहली किस्त जारी, अब धरातल पर काम शुरू होने का इंतजार
कुल ₹828.27 लाख की स्वीकृत लागत के मुकाबले ₹277.31 लाख की पहली किस्त अवमुक्त होने का विवरण सामने आया है। यानी परियोजनाओं को कागजी स्वीकृति से आगे बढ़ाकर धरातल पर उतारने के लिए शुरुआती धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।
अब क्षेत्रवासियों की नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित विभाग कब तक निर्माण कार्य शुरू कराता है और स्वीकृत पांचों सड़कों का काम निर्धारित मानकों के अनुसार कितने समय में पूरा होता है।
विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी का वर्जन
मेहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा, “मेहदावल के सर्वांगीण विकास और ग्रामीण क्षेत्रों की सुगम कनेक्टिविटी के लिए मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के अंतर्गत 8.30 किलोमीटर लंबी पांच प्रमुख सड़कों के निर्माण के लिए ₹8.28 करोड़ से अधिक की वित्तीय स्वीकृति मिलना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मेहदावल की जनता की ओर से आभार व्यक्त करता हूं।”
उन्होंने कहा कि इन मार्गों के बनने से ग्रामीण क्षेत्रों में सुगम, सुरक्षित और तेज आवागमन की सुविधा बेहतर होगी। विधायक के मुताबिक, गांवों और मजरों को मुख्य धारा से जोड़ने तथा क्षेत्र के विकास को गति देने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।
विकास का अगला पैमाना सड़क बनने के बाद दिखेगा
मेहदावल में स्वीकृत इन पांच परियोजनाओं को ग्रामीण कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम माना जा सकता है। हालांकि, किसी भी सड़क परियोजना की सफलता का वास्तविक आकलन स्वीकृति की राशि से नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, समय पर पूर्णता और उसके बाद ग्रामीणों को मिलने वाली स्थायी सुविधा से होगा।
फिलहाल ₹8.28 करोड़ से अधिक की स्वीकृति और ₹2.77 करोड़ से अधिक की पहली किस्त से परियोजनाओं के क्रियान्वयन का रास्ता खुला है। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए कार्यों को निर्धारित समयसीमा और तकनीकी मानकों के अनुरूप पूरा करे, ताकि ग्रामीणों को लंबे समय तक इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

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