(Report and edited by-Mohammad Sayeed Pathan)
संतकबीरनगर। महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर उत्तर प्रदेश शासन के मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत संतकबीरनगर पुलिस ने जनपद के सभी थाना क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रमों में एंटी रोमियो टीमों, महिला बीट अधिकारियों और मिशन शक्ति टीमों ने सार्वजनिक स्थानों, बाजारों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर महिलाओं, बालिकाओं और आमजन को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों तथा उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी दी।
अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ग्राम चौपाल रहा, जहां पुलिसकर्मियों ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना और शिकायतों के त्वरित एवं विधिसम्मत निस्तारण के लिए भरोसा दिलाया।
पुलिस के अनुसार अभियान के दौरान एंटी रोमियो टीमों ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और आवासीय क्षेत्रों में जाकर महिलाओं एवं छात्राओं को जागरूक किया। कोतवाली खलीलाबाद की टीम ने डीघा बाईपास और मेंहदावल बाईपास, महिला थाना ने कांशीराम आवास कॉलोनी, महुली पुलिस ने अजाव, मेंहदावल पुलिस ने सीयर चौक बाजार, बखिरा पुलिस ने सई लंगड़ी तथा बेलहरकला पुलिस ने पजरा भीरी में महिलाओं, बालिकाओं और स्कूली छात्राओं को पंपलेट वितरित कर जानकारी दी।
जागरूकता कार्यक्रमों में महिलाओं को अपराध से बचाव, आत्मरक्षा और अपने कानूनी अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया गया।
हेल्पलाइन नंबरों की दी गई जानकारी
पुलिस टीमों ने महिलाओं और आमजन को विभिन्न आपातकालीन एवं सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी दी। इनमें महिला हेल्पलाइन 1090, आपातकालीन सेवा 112, एंबुलेंस सेवा 108, बाल सहायता नंबर 1098 और साइबर हेल्पलाइन 1930 प्रमुख रहे। साइबर अपराध की शिकायत के लिए cybercrime.gov.in पोर्टल की जानकारी भी दी गई।
पुलिस ने महिलाओं से अपील की कि किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, धमकी या अपराध की स्थिति में चुप रहने के बजाय उपलब्ध कानूनी और सहायता तंत्र का इस्तेमाल करें।
ग्राम चौपाल में संवाद पर जोर
महिला बीट अधिकारियों और मिशन शक्ति टीमों ने ग्रामीण इलाकों में चौपाल लगाकर महिलाओं से सीधे संवाद किया। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं, आत्मरक्षा के उपायों और सहायता सेवाओं के बारे में बताया गया। महिलाओं से कहा गया कि वे निडर होकर अपनी समस्याएं सामने रखें और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं।
विश्लेषण: जागरूकता जरूरी, लेकिन प्रभाव का आकलन भी हो
मिशन शक्ति जैसे अभियानों की सबसे बड़ी उपयोगिता केवल पंपलेट बांटने या हेल्पलाइन नंबर बताने तक सीमित नहीं है। इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि जागरूकता के बाद कितनी महिलाएं अपने अधिकारों और सहायता तंत्र का इस्तेमाल कर पा रही हैं तथा शिकायत मिलने पर पुलिस कितनी तेजी और संवेदनशीलता से कार्रवाई करती है।
गांवों में चौपाल के जरिए पुलिस और ग्रामीणों के बीच सीधा संवाद निश्चित रूप से सकारात्मक कदम है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार जानकारी के अभाव, सामाजिक दबाव या पुलिस तक पहुंचने में झिझक के कारण महिलाएं अपनी समस्याएं सामने नहीं रख पातीं। ऐसे में महिला बीट अधिकारियों की नियमित मौजूदगी और निरंतर संवाद इस अभियान को अधिक प्रभावी बना सकता है।
साथ ही, सड़क सुरक्षा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन को अभियान से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है। महिलाओं और आमजन की सुरक्षा केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षित आवागमन और सार्वजनिक स्थानों पर भयमुक्त वातावरण से भी जुड़ी है।
कुल मिलाकर, संतकबीरनगर पुलिस का यह अभियान जागरूकता, संवाद और त्वरित शिकायत निस्तारण को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। अब चुनौती यह है कि अभियान को केवल कार्यक्रम आधारित गतिविधि न बनाकर नियमित फॉलोअप और जमीनी कार्रवाई से जोड़ा जाए, ताकि मिशन शक्ति 5.0 का उद्देश्य वास्तविक रूप से महिलाओं के सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन में दिखाई दे।







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