- विधान परिषद सदस्य सुभाष यदुवंश बोले—सैनिकों का सम्मान समारोह तक सीमित न रहे, उनके परिवारों की समस्याओं का समाधान भी हो
Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
संतकबीरनगर । देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों का त्याग, शौर्य और बलिदान केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और स्वाभिमान की नींव है। इसी भावना के साथ संतकबीरनगर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वीर गाथा एवं सैनिक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। वीर चक्र सिपाही सत्यवान सिंह सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों, वीर नारियों, शहीद परिवारों और सैन्य सेवा से जुड़े लोगों को सम्मानित कर उनके योगदान को याद किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे विधान परिषद सदस्य एवं उत्तर प्रदेश विधान परिषद की विनियमन समिति के सभापति सुभाष यदुवंश ने सैनिकों के साहस, अनुशासन, त्याग और राष्ट्रभक्ति को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में मातृभूमि की रक्षा करने वाले सैनिकों का सम्मान करना केवल सरकार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
शहीदों की वीरता को याद करना ही नहीं, उनके आदर्शों को अपनाना भी जरूरी
मुख्य अतिथि ने संतकबीरनगर की गौरवशाली सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में वीर चक्र से सम्मानित सिपाही सत्यवान सिंह सहित जनपद के वीर सपूतों के शौर्य और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि शहीदों का योगदान किसी सम्मान समारोह या प्रशस्ति-पत्र तक सीमित नहीं हो सकता। उनकी वीरता की गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सैनिकों के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी, परिश्रम और जिम्मेदारी के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
इस संदेश का व्यापक महत्व है। देश के प्रति जिम्मेदारी केवल सीमा पर तैनात सैनिकों तक सीमित नहीं होती। अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना, सामाजिक जिम्मेदारियों को समझना और सार्वजनिक जीवन में अनुशासन बनाए रखना भी राष्ट्र निर्माण का हिस्सा है।
वीर नारियों और शहीद परिवारों के सम्मान के साथ कल्याण पर जोर
समारोह में सैनिकों के परिवारों के त्याग और संघर्ष को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया। सुभाष यदुवंश ने कहा कि सैनिक के साथ उसका परिवार भी धैर्य, प्रतीक्षा और त्याग की कठिन परिस्थितियों से गुजरता है। विशेष रूप से शहीदों के माता-पिता, वीर नारियों और आश्रितों के प्रति सम्मान तथा उनकी समस्याओं का समाधान समाज और प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान केवल मंच पर सम्मानित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पात्र परिवारों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना, उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनना और संबंधित विभागों के माध्यम से उनका समाधान कराना भी उतना ही आवश्यक है।
यही इस समारोह का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा। सम्मान समारोह सैनिकों के योगदान को सार्वजनिक पहचान देते हैं, लेकिन उनकी सार्थकता तब और बढ़ती है, जब सम्मानित परिवारों को वास्तविक जीवन में भी सहायता, सम्मान और सुविधाएं उपलब्ध हों।
सिपाही सत्यवान सिंह सहित वीर सैनिकों की शौर्यगाथा का स्मरण
जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी कर्नल राम मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने जनपद की सैन्य परंपरा और वीर सैनिकों के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में वीर चक्र से अलंकृत सिपाही सत्यवान सिंह के साथ आतंकवाद विरोधी अभियानों और अन्य सैन्य दायित्वों में योगदान देने वाले जनपद के सैनिकों को श्रद्धापूर्वक याद किया।
कर्नल राम मिश्रा ने पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके आश्रितों के कल्याण के प्रति जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने बताया कि कार्यालय शासन की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने, पात्रतानुसार सहायता उपलब्ध कराने और समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करता रहेगा।
इन सैनिकों, पूर्व सैनिकों और परिवारों को मिला सम्मान
समारोह में वीर चक्र से मरणोपरांत सम्मानित सिपाही सत्यवान सिंह के भाई विजय बहादुर सिंह, सेना मेडल से सम्मानित हवलदार योगेन्द्र कुमार, वायु सेना मेडल से सम्मानित सर्जेंट सुधाकर यादव की पत्नी मंजू यादव तथा सिपाही गणेश शंकर की पत्नी गुड़िया देवी को सम्मानित किया गया।
इसके अतिरिक्त स्प्र एजाज अहमद अंसारी की माता शक्लैन खातून, द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिकों की विधवाओं शकीरून निशा, चंद्रावती और शांति देवी को भी सम्मान दिया गया।
पूर्व सैनिकों में पूर्व सूबेदार यदुनंदन मिश्रा, पूर्व सिपाही कपिल देव तिवारी, पूर्व नायक राम शंकर पाल, पूर्व सिपाही राम दास और पूर्व सूबेदार निरंकार राय को सम्मानित किया गया।
इन सभी के सम्मान के माध्यम से सैन्य सेवा, पारिवारिक त्याग और देश के प्रति योगदान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया।
सम्मान के साथ जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी
वीर गाथा एवं सैनिक सम्मान समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि देश की रक्षा करने वालों और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता केवल शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए। पूर्व सैनिकों के अनुभव का सामाजिक उपयोग, वीर नारियों की समस्याओं का समाधान और पात्र आश्रितों तक सरकारी सहायता पहुंचाना ऐसे विषय हैं, जिन पर निरंतर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के अंत में कर्नल राम मिश्रा ने मुख्य अतिथि, प्रशासनिक अधिकारियों, आयोजन में सहयोग करने वाले कर्मियों और पूर्व सैनिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह में हवलदार रमाकांत, हवलदार राम जनम, अभिषेक कुमार, इष्टदेव, अच्छेलाल और गौरीशंकर सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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