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संतकबीरनगर: नवरात्रि-दशहरा को लेकर पुलिस अलर्ट, महुली और दुधारा में ग्राम प्रहरियों के साथ बैठक; संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश


मूर्ति विसर्जन और दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा पर जोर, गांवों में विवाद या अशांति की आशंका होने पर तत्काल सूचना देने को कहा गया

संतकबीरनगर। शारदीय नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा और मूर्ति विसर्जन के दौरान शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संतकबीरनगर पुलिस ने ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने की कवायद शुरू की है। इसी क्रम में 11 अक्टूबर 2026 को थाना महुली और थाना दुधारा परिसर में ग्राम प्रहरियों (चौकीदारों) के साथ बैठकें आयोजित की गईं। दोनों बैठकों में गांवों के दुर्गा प्रतिमा पंडालों, प्रमुख आयोजन स्थलों और संवेदनशील गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए।

पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में थाना महुली की बैठक थानाध्यक्ष दुर्गेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में हुई, जबकि थाना दुधारा में थानाध्यक्ष अमित कुमार कुशवाहा ने ग्राम प्रहरियों के साथ बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

गांवों में सतर्कता और पुलिस से तत्काल समन्वय पर जोर

बैठकों में ग्राम प्रहरियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने गांवों में स्थापित दुर्गा प्रतिमा पंडालों और प्रमुख आयोजन स्थलों पर सतर्क निगरानी रखें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि, आपसी विवाद या शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका सामने आने पर तत्काल संबंधित थानाध्यक्ष, बीट पुलिस अधिकारी अथवा हल्का प्रभारी को सूचना दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

ग्राम प्रहरियों से असामाजिक तत्वों पर नजर रखने, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारा बनाए रखने तथा त्योहारों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना तंत्र को मजबूत बनाने और पुलिस व ग्राम प्रहरियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।

थाना महुली में बैठक के दौरान ग्राम प्रहरियों को फल वितरित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया गया। इसे ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका और योगदान के प्रति सम्मान के रूप में देखा गया।


त्योहारों की सुरक्षा में ग्राम प्रहरियों की भूमिका अहम

ग्रामीण इलाकों में ग्राम प्रहरी स्थानीय गतिविधियों और संभावित विवादों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। दुर्गा पूजा पंडालों, जुलूसों और मूर्ति विसर्जन के दौरान भीड़ बढ़ने तथा अलग-अलग आयोजनों के एक साथ होने की स्थिति में स्थानीय स्तर पर सतर्कता और समय पर सूचना का विशेष महत्व रहता है।

हालांकि, केवल बैठक और निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्राप्त सूचनाओं पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है, संवेदनशील स्थलों पर पुलिस की मौजूदगी कैसी रहती है और किसी विवाद की स्थिति में संबंधित अधिकारी कितनी तत्परता से हस्तक्षेप करते हैं।

असली कसौटी: निर्देशों का जमीन पर पालन

महुली और दुधारा में हुई बैठकों से त्योहारों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी और समन्वय मजबूत करने का प्रयास सामने आया है। अब जरूरी होगा कि ग्राम प्रहरियों को स्पष्ट सूचना-प्रणाली उपलब्ध रहे और उनकी ओर से दी गई शिकायतों या चेतावनियों को गंभीरता से लिया जाए।

त्योहारों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की जिम्मेदारी पुलिस, प्रशासन, आयोजन समितियों और स्थानीय नागरिकों की साझा है। सतर्कता के साथ संवाद, समय पर कार्रवाई और आपसी सहयोग ही किसी संभावित विवाद को बढ़ने से रोकने में मददगार हो सकते हैं।

मिशन संदेश की नजर: त्योहारों से पहले पुलिस की तैयारियां जरूरी हैं, लेकिन उनकी सफलता का आकलन बैठकों की संख्या से नहीं, बल्कि गांवों में शांति, सुरक्षा और समय पर पुलिस कार्रवाई से होगा।

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