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संतकबीरनगर में नवरात्रि से पहले तीन थाना क्षेत्रों में पुलिस की चौकसी, पीस कमेटियों में नियमों की याद दिलाई—अब असली परीक्षा जुलूस और विसर्जन के दिन


  • धर्मसिंहवा, सांथा और मेंहदावल में पीस कमेटी की बैठक, कस्बे में ASP की पैदल गश्त; डीजे, जुलूस मार्ग, अतिक्रमण और सोशल मीडिया पर अफवाहों को लेकर सतर्कता

Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh 

संतकबीरनगर। शारदीय नवरात्रि और दुर्गापूजा को लेकर संतकबीरनगर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। 8 अक्टूबर 2026 को धर्मसिंहवा, बेलहरकला क्षेत्र की सांथा चौकी और मेंहदावल थाना परिसर में पीस कमेटियों की बैठक आयोजित की गई। वहीं अपर पुलिस अधीक्षक ने मेंहदावल कस्बे में पैदल गश्त कर बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

इन बैठकों में प्रशासन ने आयोजकों और स्थानीय लोगों को शांतिपूर्ण आयोजन के लिए नियमों का पालन करने की अपील की, लेकिन इन तैयारियों की असली परीक्षा अब प्रतिमा विसर्जन, जुलूस, भीड़ और देर रात होने वाले आयोजनों के दौरान होगी।

धर्मसिंहवा में शांति व्यवस्था के साथ सोशल मीडिया पर भी नजर


धर्मसिंहवा थाना परिसर में एसडीएम मेंहदावल क्षिप्रा पाल, सीओ मेंहदावल सर्वदवन सिंह, नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी आशुतोष ओझा और थानाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह की मौजूदगी में पीस कमेटी की बैठक हुई।

आयोजकों और जनप्रतिनिधियों से प्रतिमा स्थापना, पूजा, जागरण, जुलूस और विसर्जन के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करने को कहा गया। डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के निर्धारित मानकों के अनुसार इस्तेमाल, जुलूस के तय मार्ग, यातायात और विद्युत सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।

साथ ही अफवाहों और सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं को आगे न बढ़ाने की अपील की गई।

सांथा में भी वही तैयारी, लेकिन चुनौती जमीनी अमल की

बेलहरकला थाना क्षेत्र की चौकी सांथा में भी पीस कमेटी की बैठक कर आयोजकों और स्थानीय लोगों को पर्व के दौरान शांति एवं सौहार्द बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, डीजे की आवाज, जुलूस मार्ग, यातायात और विद्युत सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पुलिस ने सतर्क रहने को कहा। संदिग्ध गतिविधि या किसी अफवाह की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील भी की गई।

हालांकि यहां भी सवाल यही है कि बैठक में दिए गए निर्देश जुलूस और विसर्जन के दौरान कितनी प्रभावी ढंग से लागू होते हैं। खासकर भीड़ बढ़ने, सड़क पर यातायात दबाव और ध्वनि मानकों के उल्लंघन जैसी परिस्थितियों में पुलिस की तत्काल प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

मेंहदावल में बैठक के साथ सड़क पर भी दिखी पुलिस

मेंहदावल थाना परिसर में अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह की मौजूदगी में पीस कमेटी की बैठक हुई। इसमें एसडीएम क्षिप्रा पाल, सीओ सर्वदवन सिंह, प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार सिंह, मूर्ति आयोजक, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग शामिल हुए।

पुलिस ने आयोजकों को नियमों के पालन के साथ जुलूस के निर्धारित मार्ग, यातायात व्यवस्था, डीजे और सुरक्षा मानकों को लेकर निर्देश दिए।

इसी दिन अपर पुलिस अधीक्षक ने सीओ के साथ मेंहदावल कस्बे में पैदल गश्त भी की। प्रमुख बाजारों, भीड़भाड़ वाले स्थानों और संवेदनशील क्षेत्रों का जायजा लिया गया। दुकानदारों और आमजन से संवाद कर संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की गई।

गश्त के दौरान सड़क पर अनावश्यक रूप से खड़े वाहनों को हटवाया गया और दुकानदारों को अतिक्रमण से बचने तथा सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।


बैठकों से आगे बढ़कर दिखानी होगी तैयारी

तीनों क्षेत्रों में पीस कमेटी की बैठक और मेंहदावल में पैदल गश्त पुलिस की प्रिवेंटिव पुलिसिंग का हिस्सा है। लेकिन त्योहारों में कानून-व्यवस्था की चुनौती केवल बैठक करने से खत्म नहीं होती।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल होंगे—
क्या निर्धारित जुलूस मार्गों पर पर्याप्त पुलिस बल रहेगा?
क्या डीजे और ध्वनि मानकों का पालन वास्तव में कराया जाएगा?
क्या अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग से यातायात प्रभावित नहीं होगा?
क्या सोशल मीडिया की अफवाहों पर तत्काल प्रतिक्रिया की व्यवस्था तैयार है?
और सबसे अहम, विसर्जन के समय भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम होंगे?

असली परीक्षा पर्व के दौरान

पुलिस-प्रशासन ने तैयारी और सतर्कता के संकेत जरूर दिए हैं। पीस कमेटी की बैठकों से संवाद का रास्ता मजबूत होता है और पैदल गश्त से पुलिस की मौजूदगी का संदेश जाता है। लेकिन इन व्यवस्थाओं की वास्तविक सफलता त्योहार के दौरान जमीन पर नियमों के पालन और किसी अप्रिय स्थिति से पहले उसे रोकने की क्षमता से तय होगी।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि धर्मसिंहवा, सांथा और मेंहदावल में बैठकों में दिए गए निर्देश केवल कागज तक सीमित रहते हैं या नवरात्रि से लेकर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन तक उनका असर वास्तव में सड़कों पर भी दिखाई देता है।

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