- मिशन शक्ति फेज-6 के तहत जागरूकता कार्यक्रम, लघु फिल्म के जरिए बालिकाओं को बताए बाल विवाह के दुष्परिणाम
Report by- Mohammad Sayeed Pathan Editor Mission Sandesh
संतकबीरनगर। “बचपन सपनों के लिए है, जिम्मेदारियों के बोझ के लिए नहीं”— इसी संदेश के साथ संतकबीरनगर जिले की महुली पुलिस ने बाल विवाह और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाया। मिशन शक्ति फेज-6 के अंतर्गत 18 अक्टूबर 2026 को ग्राम महुली में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं और बालिकाओं को बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का आयोजन पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन, क्षेत्राधिकारी धनघटा अभयनाथ मिश्र के पर्यवेक्षण और महुली थानाध्यक्ष दुर्गेश पाण्डेय के नेतृत्व में मिशन शक्ति टीम ने किया।
बाल विवाह: बचपन, शिक्षा और भविष्य के सामने चुनौती
कार्यक्रम में लघु फिल्म के माध्यम से बाल विवाह से होने वाले सामाजिक, शैक्षणिक और व्यक्तिगत नुकसान को समझाया गया। पुलिस टीम ने बालिकाओं को बताया कि कम उम्र में विवाह उनके शैक्षणिक विकास, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व निर्माण और आत्मनिर्भर बनने की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। बालिकाओं को अपनी पढ़ाई जारी रखने, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और भविष्य के लिए अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।
बाल विवाह केवल किसी एक परिवार का निजी मामला नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर सामाजिक प्रश्न है। इसे रोकने के लिए कानून की जानकारी के साथ परिवारों और समुदायों की सोच में बदलाव भी जरूरी है। जागरूकता कार्यक्रमों की उपयोगिता इसी बात में है कि समाज बाल विवाह को परंपरा या मजबूरी मानने के बजाय बच्चों के अधिकारों के दृष्टिकोण से देखे।
दबाव या बाल विवाह की जानकारी मिलने पर सहायता लेने की अपील
महिलाओं और बालिकाओं को बताया गया कि किसी भी प्रकार के दबाव, उत्पीड़न अथवा बाल विवाह की आशंका या जानकारी मिलने पर पुलिस और संबंधित सहायता सेवाओं से संपर्क करने में संकोच न करें। पुलिस ने संदेश दिया कि बेटियों की सुरक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जागरूकता से आगे कार्रवाई भी जरूरी
बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके साथ समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई, परिवारों की काउंसलिंग, विद्यालयों में बच्चों की निरंतर उपस्थिति और स्थानीय स्तर पर निगरानी भी आवश्यक है। विशेष रूप से उन परिस्थितियों में, जहां आर्थिक कठिनाइयों, सामाजिक दबाव या परंपराओं के कारण कम उम्र में विवाह का प्रयास किया जाता है, वहां बच्चों को संरक्षण और परिवारों को उचित मार्गदर्शन मिलना जरूरी है।
मिशन शक्ति फेज-6 के तहत महुली पुलिस ने महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त बनाने के साथ सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया। अभियान का मूल संदेश यही रहा कि बेटियों के बचपन को विवाह की जिम्मेदारियों में बांधने के बजाय उन्हें शिक्षा, सम्मान और अपने भविष्य के चुनाव का अवसर दिया जाना चाहिए।
संतकबीरनगर पुलिस का संदेश: बेटी की उम्र नहीं, उसके सपनों को बढ़ने दें। बचपन को विवाह नहीं, शिक्षा और संस्कार दें। कुरीतियों को रोकना ही सशक्त समाज की पहचान है।

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