ब्यूरो रिपोर्ट जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में जाली नोटों के कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा होने से सुरक्षा एजेंसियों के सामने गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बजाज नगर थाना पुलिस और सीएसटी टीम की संयुक्त कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर 4 लाख 30 हजार 500 रुपये के जाली नोट बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, बरामद नोटों की खेप बांग्लादेश से गिरोह के कथित मुख्य सरगना के जरिए जयपुर पहुंची थी और इन्हें आगामी नगर निगम चुनाव के दौरान बाजार में खपाने की तैयारी थी।
मामले का राजनीतिक पहलू तब सामने आया, जब गिरफ्तार आरोपियों में साहिल चौधरी का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार साहिल, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आरसी चौधरी का बेटा है। हालांकि, किसी आरोपी की गिरफ्तारी या पुलिस पूछताछ में सामने आया आरोप अपने आप में दोष सिद्धि नहीं है। मामले में आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगी।
बांग्लादेश से जयपुर तक पहुंची जाली नोटों की कथित खेप
पुलिस पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि जाली नोटों की सप्लाई अमन राणा नामक व्यक्ति के नेटवर्क से हुई। पुलिस के अनुसार अमन राणा मूल रूप से रोहतक, हरियाणा का रहने वाला है और फिलहाल बांग्लादेश से इस नेटवर्क का संचालन कर रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सीमा पार से जाली मुद्रा जयपुर तक किस माध्यम और किन संपर्कों के जरिए पहुंची।
अगर पुलिस की यह थ्योरी जांच में पुष्ट होती है तो मामला महज जाली नोट रखने या चलाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके पीछे मौजूद अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन की पड़ताल भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।
चुनाव में खपाने की कथित तैयारी ने बढ़ाई चिंता
मामले का सबसे गंभीर पहलू जाली नोटों को आगामी नगर निगम चुनाव में खपाने की कथित योजना है। चुनाव के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी का इस्तेमाल सामान्य तौर पर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा रहता है। ऐसे में जाली मुद्रा को चुनावी माहौल में बाजार में उतारने की कोशिश न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सीधा असर डाल सकती है।
हालांकि, पुलिस को अभी यह स्पष्ट करना होगा कि जाली नोट वास्तव में चुनावी गतिविधियों में इस्तेमाल होने थे या केवल आरोपियों की पूछताछ में ऐसी योजना का दावा सामने आया है। इस बिंदु पर आगे की जांच निर्णायक होगी।
चार आरोपी गिरफ्तार, दो लग्जरी वाहन जब्त
पुलिस ने मामले में अंशुल, साहिल चौधरी, प्रियांशु और आकाश को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 4,30,500 रुपये के जाली नोट बरामद किए गए। पुलिस ने कथित तौर पर जाली नोटों के परिवहन में इस्तेमाल स्कॉर्पियो और फॉर्च्यूनर को भी जब्त किया है।
अब जांच का अगला चरण यह पता लगाना है कि जयपुर में इस नेटवर्क का स्थानीय संपर्क कौन था, नोट किन लोगों तक पहुंचाए जाने थे और क्या बरामद रकम के अलावा भी जाली मुद्रा की कोई खेप पहले से बाजार में पहुंच चुकी है।
राजनीतिक पहचान जांच का केंद्र नहीं, लेकिन सवाल जरूर अहम
साहिल चौधरी का नाम सामने आने के बाद मामले को राजनीतिक रंग मिलना स्वाभाविक है। लेकिन जांच का केंद्र किसी आरोपी की राजनीतिक या पारिवारिक पहचान के बजाय यह होना चाहिए कि उसकी कथित भूमिका क्या थी, जाली नोटों की सप्लाई से उसका संबंध कैसे स्थापित होता है और पुलिस के पास उसके खिलाफ क्या ठोस साक्ष्य हैं।
इसी तरह कांग्रेस नेता आरसी चौधरी के लिए भी बेटे पर लगे आरोपों और उनकी व्यक्तिगत या राजनीतिक भूमिका को अलग-अलग देखना जरूरी है। केवल पारिवारिक संबंध के आधार पर किसी व्यक्ति की संलिप्तता मान लेना तथ्यात्मक और कानूनी दोनों दृष्टियों से उचित नहीं होगा।
अब असली चुनौती सप्लाई चेन तक पहुंचने की
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती गिरफ्तारियों से आगे बढ़कर मुख्य सरगना, सीमा पार नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन, स्थानीय रिसीवर और जाली नोटों के अंतिम वितरण तंत्र तक पहुंचने की है। यदि जांच एजेंसियां यह पता लगाने में सफल होती हैं कि जाली नोटों की कितनी खेप भारत में आई और किन राज्यों के रास्ते जयपुर पहुंची, तो पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश के अनुसार, चार आरोपियों को गिरफ्तार कर 4 लाख 30 हजार 500 रुपये के जाली नोट बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में बांग्लादेश से मुख्य सरगना के जरिए नोट आने और नगर निगम चुनाव में इन्हें खपाने की तैयारी की जानकारी सामने आई है। मामले में अन्य आरोपियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश जारी है।
फिलहाल जयपुर का यह मामला सिर्फ जाली नोटों की बरामदगी नहीं, बल्कि सीमा पार से संचालित कथित नेटवर्क, चुनावी प्रक्रिया में नकली मुद्रा के संभावित इस्तेमाल और स्थानीय स्तर पर उसके वितरण तंत्र की जांच का मामला बन चुका है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच यह तय करेगी कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं और चुनाव में जाली नोट खपाने की कथित साजिश में वास्तव में कितने लोग शामिल थे।

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