गोरखपुर। बधिर समुदाय को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा समानता और समावेशन की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से सीआरसी गोरखपुर द्वारा ‘बधिर समुदाय और समाज’ विषय पर एक दिवसीय सतत पुनर्वास शैक्षिक कार्यक्रम (CRE) का आयोजन किया गया। ऑनलाइन माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से कुल 94 पुनर्वास व्यावसायिकों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम का मुख्य फोकस बधिर समुदाय की सामाजिक स्थिति, उनकी आवश्यकताओं तथा समाज में समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में पुनर्वास व्यावसायिकों की भूमिका को प्रभावी बनाने पर रहा। आयोजकों के अनुसार, बधिर व्यक्तियों के लिए केवल पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा, रोजगार, संचार, सामाजिक गतिविधियों और सार्वजनिक जीवन में समान भागीदारी का अवसर मिलना भी आवश्यक है।
जागरूकता और समझ विकसित करने पर जोर
CRE कार्यक्रम का उद्देश्य पुनर्वास क्षेत्र से जुड़े व्यावसायिकों में बधिर समुदाय से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जागरूकता एवं व्यावहारिक समझ विकसित करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से इस बात पर जोर दिया गया कि बधिर व्यक्तियों को समाज में समान अधिकार और सम्मान के साथ आगे बढ़ने के अवसर मिलें।
समीक्षात्मक दृष्टि से देखा जाए तो बधिर समुदाय के सामने चुनौती केवल श्रवण संबंधी अक्षमता तक सीमित नहीं रहती। संचार में बाधाएं, सामाजिक स्वीकार्यता, शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों तक पहुंच तथा सरकारी एवं सामाजिक सुविधाओं की जानकारी का अभाव भी उनकी भागीदारी को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में पुनर्वास व्यावसायिकों का प्रशिक्षित और संवेदनशील होना समावेशी समाज की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
देशभर से जुड़े 94 पुनर्वास व्यावसायिक
ऑनलाइन आयोजन का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि इसमें देश के विभिन्न राज्यों से पुनर्वास क्षेत्र से जुड़े 94 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। ऑनलाइन माध्यम ने कार्यक्रम को भौगोलिक सीमाओं से बाहर पहुंचाने में मदद की और अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे पेशेवरों को एक साझा शैक्षिक मंच उपलब्ध कराया।
इस प्रकार के कार्यक्रमों की उपयोगिता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि पुनर्वास क्षेत्र में कार्यरत पेशेवर सीधे बधिर व्यक्तियों और उनके परिवारों के संपर्क में रहते हैं। उनके प्रशिक्षण और दृष्टिकोण का प्रभाव सेवाओं की गुणवत्ता तथा लाभार्थियों के सामाजिक समावेशन पर पड़ सकता है।
निदेशक ने दी सफलता की शुभकामनाएं
सीआरसी गोरखपुर के निदेशक श्री जितेंद्र यादव ने कार्यक्रम की सफलता पर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन को पुनर्वास क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के ज्ञान और समझ को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यक्रम का समन्वय श्री हरकेश गौतम ने किया। उनके समन्वय में आयोजित इस ऑनलाइन CRE कार्यक्रम में प्रतिभागियों की सहभागिता ने बधिर समुदाय से जुड़े विषयों पर निरंतर प्रशिक्षण और संवाद की आवश्यकता को रेखांकित किया।
समावेशी समाज की दिशा में प्रशिक्षण अहम
कुल मिलाकर, ‘बधिर समुदाय और समाज’ विषय पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक प्रशिक्षण गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि बधिर व्यक्तियों को समान अवसर और सामाजिक सम्मान दिलाने की व्यापक सोच से जुड़ा प्रयास है। यदि पुनर्वास सेवाओं के साथ समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और प्रभावी संचार के प्रयास भी समानांतर रूप से आगे बढ़ते हैं, तो बधिर समुदाय की शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी को अधिक मजबूत आधार मिल सकता है।
सीआरसी गोरखपुर का यह आयोजन इसी दिशा में पुनर्वास व्यावसायिकों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने तथा समानता, समावेशन और सामाजिक भागीदारी के विचार को मजबूत करने की पहल के रूप में देखा जा सकता है।

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