संतकबीरनगर। परिवारों में बढ़ते आपसी विवाद कई बार रिश्तों को ऐसे मोड़ पर पहुंचा देते हैं, जहां साथ रहना मुश्किल और अलग होना आसान नजर आने लगता है। ऐसे मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई ही समाधान नहीं होती, बल्कि संवाद और आपसी समझ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसी सोच के तहत मिशन शक्ति फेज-5.0 के अंतर्गत चल रहे “साथ-साथ कार्यक्रम” के तहत थाना धनघटा स्थित परिवार परामर्श केंद्र में पांच पारिवारिक मामलों में सुलह-समझौते का प्रयास किया गया।
04 अक्टूबर 2026 को आयोजित परामर्श प्रक्रिया की अध्यक्षता परिवार परामर्श केंद्र प्रभारी म0उ0नि0 अंजली सरोज ने की। इस दौरान थाने पर नियुक्त काउंसलर अवध नारायण मिश्र की मौजूदगी में पारिवारिक विवादों से जुड़े कुल पांच मामले सामने आए। पुलिस के अनुसार, सभी पांच मामलों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराकर आपसी सहमति से सुलह-समझौता कराया गया।
पहले मामले में थाना धनघटा क्षेत्र के नावनखुर्द निवासी चन्द्र प्रकाश और अम्बेडकरनगर के थाना बसखारी क्षेत्र की रामडीह सराय निवासी मोनिका के बीच पारिवारिक विवाद के चलते रिश्ता टूटने की स्थिति में पहुंच गया था। परामर्श के बाद दोनों पक्ष साथ रहने के लिए सहमत हुए और आपसी सहमति से समझौता कराया गया।
दूसरे मामले में मंजू देवी और विजय चौहान, दोनों निवासी हैसर बाजार, के बीच चल रहे पारिवारिक विवाद को लेकर परामर्श किया गया। समझाने-बुझाने के बाद दोनों ने साथ रहने पर सहमति जताई।
तीसरे मामले में थाना धनघटा क्षेत्र के संठी जनौली निवासी गुड्डी और हरिराम के बीच विवाद सामने आया था। काउंसलिंग के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और उन्हें साथ रहने के लिए राजी किया गया।
चौथे मामले में थाना धनघटा क्षेत्र के लहुरेगांव निवासी कविता वर्मा और थाना बखिरा क्षेत्र के सीटकर बढ़या निवासी अमित वर्मा के बीच पारिवारिक विवाद का मामला सामने आया। दोनों पक्षों को समझाने के बाद आपसी सहमति से सुलह-समझौता कराया गया।
पांचवें मामले में गोरखपुर जनपद के थाना बांसगांव क्षेत्र निवासी नीतु और धनघटा क्षेत्र के बभनौली निवासी सुनील के बीच पारिवारिक विवाद को लेकर परामर्श किया गया। पुलिस के अनुसार, बातचीत के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी और समझौता कराया गया।
पुलिस की इस पहल को केवल पांच मामलों के निस्तारण के आंकड़े के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। परिवार परामर्श केंद्र की वास्तविक उपयोगिता इस बात में है कि विवाद की गंभीरता बढ़ने से पहले संबंधित पक्षों को संवाद का अवसर मिले और यदि दोनों की सहमति हो तो रिश्ते को बचाने की संभावना तलाश की जा सके। हालांकि, ऐसे समझौते तभी प्रभावी माने जा सकते हैं जब दोनों पक्ष अपनी इच्छा से सहमत हों और भविष्य में भी आपसी सम्मान एवं संवाद बनाए रखें।
“टूटते परिवार को जोड़ने” की पहल के तहत हुए इन पांच समझौतों से फिलहाल पुलिस को यह संदेश देने का अवसर जरूर मिला है कि पारिवारिक विवादों में कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ परामर्श, संवाद और सहमति आधारित समाधान का रास्ता भी महत्वपूर्ण हो सकता है। अब इन परिवारों के लिए चुनौती यह होगी कि परामर्श केंद्र में बनी सहमति व्यवहारिक जीवन में भी कायम रहे।
पुलिस के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य पारिवारिक विवादों को संवाद एवं परामर्श के माध्यम से सुलझाते हुए परिवारों को टूटने से बचाने की दिशा में प्रयास करना है।


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